रेलवे स्क्रैप डील को लेकर उठे बड़े सवाल—क्या बिचौलियों का खेल या पूरी तरह पारदर्शी सिस्टम?
विशेष संवाददाता: रेलवे स्क्रैप की बड़ी डील को लेकर इन दिनों हलचल तेज हो गई है। स्क्रैप की बिक्री प्रक्रिया, मूल्य निर्धारण और बिचौलियों की भूमिका को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार, लाखों टन रेलवे स्क्रैप के निपटान की प्रक्रिया चल रही है, जिसे लेकर बाजार में भी काफी दिलचस्पी देखी जा रही है। हालांकि, इस बीच यह मुद्दा भी सामने आ रहा है कि क्या पूरी प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी है या इसमें कुछ बिचौलियों की भूमिका भी है।
रेलवे अधिकारियों का कहना है कि स्क्रैप की बिक्री पूरी तरह Indian Railways के तय नियमों के अनुसार की जा रही है। नीलामी की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए ई-ऑक्शन जैसे सिस्टम का उपयोग किया जाता है, जिससे सभी पात्र खरीदारों को समान अवसर मिल सके।
वहीं, बाजार में यह चर्चा भी है कि कुछ निजी एजेंट इस डील में अपनी भूमिका बनाए रखना चाहते हैं और उन्हें इस बात का डर है कि कहीं बायर और सेलर के बीच सीधा संपर्क न हो जाए, जिससे उनका कमीशन खत्म हो सकता है।
मूल्य निर्धारण को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। जानकारों का मानना है कि इतनी बड़ी मात्रा में स्क्रैप की बिक्री में बाजार दर का सही आकलन बेहद जरूरी है, ताकि सरकारी राजस्व को किसी प्रकार का नुकसान न हो।
रेलवे की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि किसी प्रकार की शिकायत या अनियमितता सामने आती है, तो उसके लिए जांच की पूरी व्यवस्था मौजूद है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
इस पूरे मामले में आने वाले दिनों में और खुलासे हो सकते हैं, जिससे यह स्पष्ट हो पाएगा कि स्क्रैप डील कितनी पारदर्शी है और इसमें किसकी क्या भूमिका है।