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मुकुंदपुर बाजार, चरपोखरी (भोजपुर) में आयोजित ब्रह्मविद्या विहंगम योग के वृहद सत्संग कार्यक्रम में मंच पर वक्ताओं और भजन गायकों के साथ उपस्थित श्रद्धालु।

मुकुंदपुर बाजार में ब्रह्मविद्या विहंगम योग का वृहद सत्संग, श्रद्धालु हुए भावविभोर

चरपोखरी (भोजपुर)। प्रखंड क्षेत्र के मुकुंदपुर बाजार में ब्रह्मविद्या विहंगम योग के तत्वावधान में भव्य सत्संग कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का नेतृत्व हरे राम प्रजापति ने किया, जबकि मंच संचालन पटना पश्चिमी मंत्री उमेश कुमार ने किया। सत्संग में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और आध्यात्मिक रसधारा में सराबोर हुए।

कार्यक्रम की शुरुआत भजन संध्या से हुई। श्रीनिवास चौधरी ने “मोहित सुनीं-सुनी आवत हंसी ये, पानी विच मीन प्यासी” भजन प्रस्तुत कर वातावरण को भक्तिमय बना दिया। वहीं दुबे डिहरा की लालती जी ने “सच्ची देवी तुम्ही हो प्यारी, पूजा देवी क्यों करूं” भजन गाकर श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया।

सत्संग सभा को संबोधित करते हुए रामनाथ यादव ने कहा कि यह सत्संग ब्रह्मविद्या विहंगम योग का दिव्य ज्ञान है, जो जीव कल्याण के लिए सद्गुरु द्वारा समय-समय पर प्रदान किया जाता है। उन्होंने कहा कि जब शिष्य सद्गुरु देव भगवान के बताए मार्ग पर साधना करता है, तो उसे अकथनीय आध्यात्मिक अनुभूति प्राप्त होती है।

तरारी प्रखंड प्रभारी अरुण कुमार चौबे ने कहा कि मनुष्य जीवन की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी सत्संग है, जिसे आत्मसात करना आवश्यक है। यह केवल सद्गुरु की कृपा से संभव है और उस कृपा की प्राप्ति के लिए सेवा सबसे बड़ा साधन है।

बिहारी औनसोन से पधारे श्रीकांत मिश्रा ने अपने संबोधन में कहा कि ब्रह्मविद्या की ज्ञानधारा सद्गुरु देव भगवान की कृपा से ही पृथ्वी पर प्रवाहित हो रही है, जो मानव कल्याण के लिए समर्पित है।

भोजपुर जिला सचिव विजय पाण्डेय ने कहा कि सत्संग प्रत्येक व्यक्ति के लिए आवश्यक है। इसके अभाव में जीवन में अनेक समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं, जिनका समाधान सेवा, सत्संग और साधना से ही संभव है।

बिहार राज्य समन्वयक सह दक्षिण बिहार महामंत्री भूपेंद्र राय ने कहा कि मुकुंदपुर ग्राम में आज ब्रह्मविद्या की ज्ञानगंगा प्रवाहित हो रही है, जो सभी के लिए सौभाग्य का विषय है। उन्होंने प्रश्न उठाया कि मानव जीवन क्यों मिला और बंधन (इच्छा) व मुक्ति में क्या अंतर है—इनका उत्तर केवल पूर्ण समर्थ सद्गुरु ही दे सकते हैं। उन्होंने कहा कि जैसे महाभारत काल में श्रीकृष्ण ने अर्जुन को दिव्य ज्ञान दिया था, उसी प्रकार आज सद्गुरु समस्त मानवता को यह पुनीत ज्ञान प्रदान कर रहे हैं। पूजा का वास्तविक अर्थ पुरुष के पास जाना है, और वही पुरुष सद्गुरु देव भगवान हैं, जो जीव को भवसागर से पार कर सकते हैं।

कार्यक्रम को सफल बनाने में भोजपुर जिला मीडिया प्रभारी सुरेश कुमार, विरेंद्र सिंह, गणेश साह, धर्मेंद्र कुमार धीरज, लाल मुनि मिश्रा, मालती देवी एवं नीलाम देवी की सराहनीय भूमिका रही।