क्या लिखूं…..?ऐसा जो हर किसी के लिए एक रौशनी बन जाए आंसू की एक एक बूँद सबके लिए दीप बनकर जगमगाए …चाह्तों के जहाजों पर अक्सर […]
ज्ञान की बात
मानस संजीवनी ज्ञानपीठ (सनातन वैदिक शिक्षा एवं शोध संस्थान) परिवार के प्रति हमें सच्चे अर्थों में कर्त्तव्यपरायण और उत्तरदायित्व निर्वाह करने वाला होना चाहिए। आज […]
मां तुझको अर्पण मेरे जीवन की फुलवारी है तुच्छ समर्पण मेरा तुझको मां तु कितनी प्यारी है मस्तक पर कर्तव्य का भार लिए हाथों में […]
मैंने सुना है वो रात के किनारों पर सुनसान अकेली राहों पर मेरे क़दमों में देखि है मैंने वो फड़कती कोंधतीबिजली सी […]
नैतिकता केवल किताबों में ही अच्छी लगती है, नैतिकता का पालन सत्ता में यदि हो तो राष्ट्र निर्माण होता है। योगिराज भगवान् श्री कृषण […]
संचित कर्मों का ऐसा ही पहाड़ बना हुआ है जिसमें शुभ अशुभ दोनो ही कर्म हैं जय सदगुरुदेव ईश् हमारे कर्म कितने गहरे हैं यह […]
कभी मौका दो खुद को कदम कदम मुस्कुराने का फूल तो हर हाल में मुस्कुराया करते हैं कभी तरीका दो खुद को वक्त के साथ […]
मेरे 19 ऊंटों में से आधे मेरे बेटे को,19 ऊंटों में से एक चौथाई मेरी बेटी को, और 19 ऊंटों में से पांचवाँ हिस्सा मेरे […]
क्योँ तुम आज भी जीवंत ही खड़े हो ….?क्या पीड़ा से तुम डरे नहीं …..?क्या पुन्य के प्रभाव गीत तुम लिखते हो …?जो डटे […]
आज हर तरफ भुखमरी देखि है मैंने आँखों में पानी दर्द में सनी लाचारी देखी है मैंने बेजुबानों की बात तो छोड़ ही डालो जुबान भी रोटी […]
मुसाफिर हूँ अपना सफर है अपनी ही कहानी लिखता हूँ …… जो छिपी है ,तुझमें असीम गहराइयाँ उसमें डूब खो जाना चाहता हूँ मुसाफिर हूँ […]
प्रिय वृक्ष प्रिय वृक्ष तुम्हारी लता रुपी झरोखों से नित ही मैं सूरज की नृत्य करती रश्मियों को देखकर आह्लादित होता हूँ ये नृत्य करती रश्मियाँ […]
अभी उड़ना बाकी है उड़ना अभी बाकी है क्यूंकि आशाओं की शान अभी बाकी है थम चुकी भावनाओं का मान अभी बाकी है सपनों की राह में […]
