२६ सितंबर २०२४ गुरुवार-‼️
-आश्विन कृष्णपक्ष नवमी २०८१-
ज्ञान की बात
१९ सितंबर २०२४ गुरुवार-‼️
-आश्विन कृष्णपक्ष द्वितीया २०८१-
‼️संजीवनी ज्ञानामृत‼️
महाराज युधिष्ठिर का संकल्प था कि वे अपनी प्रजा को सदा दान देते रहेंगे। उनके पास अक्षय पात्र था जिस की विशेषता थी कि उससे […]
नारी आज का अति सोचनीय विषय है । आज के समय को देखते हुए नारी की अस्मिता तार तार हो रही है। जगह जगह नारी शोषण , अत्याचार , बलात्कार , घटनाएं देखने को मिल रही हैं। आखिर क्या हो गया है इस पंगु समाज की सोच को ।
जब भी मन जोश से पूर्ण होता है,वह ऊंची ऊंची पर्वत श्रृंखला को भी जीत लेता है,मन को सदैव ऊर्जावान बनाए रखने का संकल्प अच्छे विचारों से सहमती है । ” मन के हारे हार है मन के जीते जीत “।
वक्त एक ऐसा परिंदा है जो अपने पंखों में सब कुछ दबाकर ले जाता है । वक्त के सामने कोई भी नहीं टिक सका है । वह अनवरत है , निरंतर गतिमान है ।
१६ अगस्त २०२४ शुक्रवार- ‼️
-श्रावण शुक्लपक्ष एकादशी २०८१-
मन मनुष्य का वह द्वार है जिसमें प्रवेश करने के बाद हमारी सम्पूर्ण जीवन की मनो वृति ही परिवर्तित हो जाती है । कहा गया है, “मन हमारा मित्र भी है और शत्रु भी”।
काव्य की सरसता मन को कोमल भाव प्रदान करती है । “कलम एक ऐसा उपकरण है जो लिखी गई बात को सत्य प्रमाणित करती है” ।
मन को सूक्ष्म रूप शरीर कह सकते हैं। मन के समान चतुर , निडर , शासक भोक्ता अन्य कोई भी नहीं है
प्रकाश का उद्देश्य अनंत को प्रकाशित करना ।मृत को प्राणवान करना । इस कविता का भाव यह है कि ओ प्रकाश यद्यपि तु प्रकाशवान है और तेरा प्रण अज्ञान रूपी अंधेरे को नष्ट करना है,फिर भी मेरे लिए तु धीरे धीरे चल ताकि मैं भी तुम्हारे साथ चल सकूं ।
वृक्ष ही जीवन है अब यह सत्य बात लोगों के लिए मात्र निज स्वार्थ सिद्धि के लिए प्रयोग में लाई जा रही है। वृक्षों की व्यथा कौन सुने सब आडम्बर की अटारी पर चढ़ कर बैठे हुए हैं। विकास तो सबको सूझ रहा है परंतु आंतरिक दुःख से हर कोई अनभिज्ञ है ।
संकल्प यदि दृढ़ है तो बाधाएं भी संघर्ष की विरोधी बन जाती हैं।अनंत के प्रेम को लगन अनंत से मिला देती है।
अधर्म जब अपनी सीमा से ऊपर उठकर चलने लगता है तो परशु धारी परशुराम जैसे गुरुओं और सुदर्शन चक्र धारी भगवान श्री कृष्ण को प्रथ्वी पर आना ही पड़ता है। फिर विजय की ललकार से अधर्म क्षत विक्षत हो जाता है।
आज के समय का मनुष्य मोह,स्वार्थ मिथ्या अहंकार में डूबकर प्रति एक कार्य कर रहा है । उसके भाषण में स्वार्थ का मिथ्यावाद है ।
