ज्ञान की बात

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सद्गुण बढ़ाने और सुसंस्कृत जीवन अपनाने पर आधारित प्रेरणात्मक संदेश—चरित्र निर्माण और आत्मविकास का प्रतीक चित्र।

सद्गुण बढ़ाएं, सुसंस्कृत बनें” — चरित्र निर्माण ही मानव जीवन की सर्वोच्च साधना

सद्गुणों का विकास मानव जीवन की सबसे बड़ी संपत्ति है। श्रेष्ठ आचरण, आत्मबल और आत्मविकास से जीवन उज्ज्वल होता है। सुसंस्कृत बनने की प्रेरणा पढ़ें।

ईश्वर न्याय करेंगे संदेश – जीवन में अन्याय, दुख और अपमान से उबरने का आध्यात्मिक मार्ग

ईश्वर न्याय करेंगे — मन को शांत रखने का एक सरल मार्ग

यह इमेज ‘ईश्वर न्याय करेंगे’ के आध्यात्मिक विचार को प्रस्तुत करती है, जो जीवन में अपमान, अन्याय और दुख जैसी परिस्थितियों में मन की शांति बनाए रखने की प्रेरणा देती है। चित्र का उद्देश्य लोगों को मानसिक दृढ़ता, धैर्य और सकारात्मक सोच के लिए प्रेरित करना है, जिससे व्यक्ति कठिन हालात में भी स्थिर और प्रसन्न रह सके।

ध्यानमग्न मनुष्य के चारों ओर सूर्य, अग्नि, चंद्रमा, जल, वायु और अन्य 14 साक्षियों के प्रतीक — कर्मों के साक्षी दर्शाते हुए।

कौन हैं मनुष्य के कर्मों के साक्षी? जानिए धर्मग्रंथों की दृष्टि से सत्य

वेदों और धर्मशास्त्रों में बताया गया है कि मनुष्य के हर कर्म के 14 साक्षी होते हैं — सूर्य, अग्नि, चंद्रमा, वायु, पृथ्वी, आकाश, जल, काल, दिन, रात्रि, संध्या, दिशाएं, इन्द्रियां और धर्म। जानिए कैसे ये साक्षी हर कर्म का हिसाब रखते हैं और मनुष्य के पाप-पुण्य का निर्धारण करते हैं।

महात्मा और व्यक्ति की प्रेरक चित्रण — खुश रहने का रहस्य: दुखों का बोझ छोड़िए, मुस्कुराइए।

खुश रहने का रहस्य : दुखों का बोझ छोड़िए, मुस्कुराइए

जीवन में खुश रहने का असली रहस्य दुखों का बोझ छोड़ देना है। यह प्रेरक कहानी बताती है कि जब हम अपने दुखों और तनाव को त्याग देते हैं, तब जीवन में सच्ची खुशी और शांति का अनुभव होता है। पढ़िए “खुश रहने का रहस्य” — एक महात्मा और उनके शिष्य की प्रेरक कथा।

सरयू तट पर श्रीराम और भरत के बीच संवाद — करुणा, धर्म और क्षमा की गहराई को दर्शाता दृश्य।

राम : दण्ड से ऊपर करुणा का धर्म

श्रीराम और भरत के संवाद में निहित जीवन संदेश — जहाँ दण्ड का अर्थ करुणा और क्षमा से पुनः परिभाषित हुआ। जानिए रामायण का यह अमर सत्य।

श्री राधा-कृष्ण की मनमोहक झांकी, पुष्पों से सुसज्जित, कर्मों के फल पर प्रेरक संदेश के साथ।

मनुष्य के कर्मों का फल: एक प्रेरक प्रसंग

जानिए मनुष्य के कर्मों का फल क्या होता है। यह प्रेरक कथा बताती है कि दूसरों की बुराई करने से पाप का हिस्सा हमारे खाते में जुड़ जाता है।

राधा-कृष्ण की झांकी, फूलों से सजी सुंदर मंदिर सजावट

लक्ष्य पर ध्यान

फूलों से सजी राधा-कृष्ण की भव्य झांकी भक्तों को भक्ति, सौंदर्य और अलौकिक शांति का अनुभव कराती है।

विचार शक्ति को परिष्कृत कीजिए

मनुष्य अपने भाग्य का निर्माता है। उसकी सफलता या असफलता विचारों की दिशा पर निर्भर करती है। आइए जानें, क्यों विचार शक्ति को परिष्कृत करना जीवन की सबसे बड़ी आवश्यकता है।

श्री राधा-कृष्ण की अलौकिक प्रतिमा, पुष्पों से सुसज्जित मंदिर दृश्य

अलग-अलग संस्कार और जीवन की सच्चाई

श्री राधा-कृष्ण की यह मनोहारी प्रतिमा भक्ति और प्रेम का अद्भुत संगम दर्शाती है। पुष्पों और अलंकारों से सुसज्जित यह मंदिर दृश्य भक्तों को शांति और आनंद का अनुभव कराता है। इस दिव्य झांकी में भक्ति की मधुर धारा प्रवाहित होती है, जो हृदय को पवित्र और आत्मा को प्रसन्न करती है।

श्री राधा-कृष्ण एवं संकटमोचन हनुमान जी की भव्य झांकी, पुष्पों और श्रृंगार से सुसज्जित

भक्ति का प्रसाद

भक्ति हमारे जीवन को धैर्य और प्रसन्नता से भर देती है। श्री राधा-कृष्ण और संकटमोचन हनुमान जी के दिव्य श्रृंगार दर्शन के माध्यम से जानें कि किस प्रकार भक्ति हमें विषमताओं में भी धैर्यवान और आनंदमय जीवन जीने की शक्ति देती है।

राधा-कृष्ण और जगन्नाथ, बलभद्र, सुभद्रा जी की अलंकृत मूर्तियाँ सजीव रूप में सुसज्जित

श्रद्धा, भक्ति, विश्वास और संकल्प: मानव जीवन की आध्यात्मिक उड़ान के स्तम्भ

राधा-कृष्ण की मनमोहक छवि और भगवान जगन्नाथ, बलभद्र, सुभद्रा की अलौकिक झांकी, श्रद्धा और भक्ति का जीवंत प्रतीक हैं। यह दृश्य न केवल सौंदर्य से परिपूर्ण है, बल्कि आस्था की ऊर्जा से भी भरपूर है।

Crisis and sorrow

संकट और दुःख: सुख-समृद्धि के अग्रदूत

दुःख के बाद सुख और संकट के बाद सुविधा आना प्रकृति का अटल नियम है। हमें बस इतना समझना है कि संकट आने पर क्या करें-क्या न करें पढ़े

Gyan Ki Baat

श्रद्धा-भक्ति-विश्वास-संकल्प

देश-भक्ति, आदर्श-भक्ति, ईश्वर-भक्ति आदि के रूपों में त्याग-बलिदान के, तप-साधना के अनुकरणीय आदर्शवादिता के अनेकों उदाहरण | जरूर पढ़े

Habits of uncivilization and their effects

सभ्यता” और “शिष्टाचार” – व्यक्तित्व के आधारस्तंभ

सभ्यता और शिष्टाचार किसी भी व्यक्ति के व्यक्तित्व को निखारने वाले दो अनमोल रत्न हैं। इन दोनों का पारस्परिक संबंध इतना घनिष्ठ है कि एक […]