(1) भारतीय मूल के आप्रवासियों की संस्कृतिक चेतना को रामचरित मानस अनुप्राणित कर रहा है। (2) जीवन में मूल्यों की प्रतिष्ठा की चाह में हर […]
भागवत कथा
सद्गुण” बढ़ाएं, “सुसंस्कृत” बनें मनुष्य के पास सबसे बड़ी पूजा सद्गुणों की है। जिसके पास जितने सद्गुण हैं, वह उतना ही बड़ा अमीर है। धन […]
यदि “श्रम” का सत्परिणाम सुनिश्चित न होता तो कोई क्यों श्रमशीलता का कष्टसाध्य मार्ग अपनाता ? कृषि, व्यापार, शिल्प, शिक्षा आदि में करोड़ों आदमी निरंतर […]
भगवान श्री कृष्ण ने महाभारत के युद्ध में अर्जुन को गीता का उपदेश दिया और इसी उपदेश को सुनकर अर्जुन को ज्ञान की प्राप्ति हुई। […]
“गलती और “गलत” में एक छोटा सा अंतर होता है – नीयत का। समय बहरा है किसी की नहीं सुनता लेकिन वह अंधा नहीं है […]
राम भारत के इष्ट हैं, आत्मा हैं, आदर्श हैं, पुरोधा हैं, संस्कृति के वाहक हैं। राम भारत के पिता हैं। राम निरीह में हैं, राम […]
तरह हरा चश्मा चढ़ा लेने पर चारों और हरा ही हरा, लाल चढ़ा लेने पर लाल ही लाल दिखाई देता है, वैसे ही संसार की […]
सत्संग कथा: एक माँ थी उसका एक बेटा था। माँ-बेटे बड़े गरीब थे। एक दिन माँ ने बेटे से कहा – बेटा !! यहाँ से […]
संजीवनी ज्ञानामृत| भलाई, उत्कृष्टता, स्वच्छता आदि सब ईश्वर प्रकृति, नैतिक विधान की धरती पर मिलती हैं; वे अनादि हैं, स्थिर हैं, अनंत हैं। सृष्टि की […]
इस संसार में अनादि काल से राग द्वेष चल रहा है, और आगे भी अनंत काल तक चलता रहेगा। राग द्वेष का मूल कारण है […]
संजीवनी ज्ञानामृत | “सद्विचारों” की महत्ता का अनुभव तो हम करते हैं, पर उन पर दृढ़ नहीं रह पाते। जब कोई अच्छी पुस्तक पढ़ते या […]
श्रीरामः शरणं समस्तजगतां रामं विना का गती, रामेण प्रतिहन्यते कलिमलं रामाय कार्यं नमः। रामात् त्रस्यति कालभीमभुजगो रामस्य सर्वं वशे, रामे भक्तिरखण्डिता भवतु मे राम! त्वमेवाश्रयः।। […]
दृष्टिकोण की विकृतियाँ हमें अकारण उलझनों में पटकती और खिन्न रहने के लिए विवश करती हैं। हम गरीब हैं या अमीर इसका निर्णय दूसरों के […]
दृष्टिकोण की विकृतियाँ हमें अकारण उलझनों में पटकती और खिन्न रहने के लिए विवश करती हैं। हम गरीब हैं या अमीर इसका निर्णय दूसरों के […]
संजीवनी ज्ञानामृत। जब संसार में सभी साथी मनुष्य का साथ छोड़ दें, पराजय और पीड़ाओं के दंश मनुष्य को घायल कर दें, पैरों के नीचे […]
संजीवनी ज्ञानामृत। आत्मभाव” का प्रयास करिए, इससे आसपास की रूखी, उपेक्षणीय, अप्रिय वस्तुओं का रूप बिलकुल बदल जाएगा। विज्ञ लोग कहते हैं कि अमृत छिड़कने […]
संजीवनी ज्ञानामृत। “आतुरता” और “अधीरता” की बुराई मनुष्य को बुरी तरह परेशान करती है। प्रायः हमें हर बात में बहुत जल्दी रहती है, जिस कार्य […]
संसार में दो प्रकार के मनुष्य होते हैं, एक वे जो “शक्तिशाली” होते हैं, जिनमें “अहंकार” की प्रबलता होती है। शक्ति के बल पर वे […]
संजीवनी ज्ञानामृत। मनुष्य कितना दीन-हीन, स्वल्प शक्ति वाला, कमजोर है । यह प्रतिदिन के जीवन से पता चलता है । उसे पग-पग पर परिस्थितियों के […]
संजीवनी ज्ञानामृत:- हम कितना भी भजन कर लें, ध्यान कर लें लेकिन हमारा संग अगर गलत है तो सुना हुआ, पढ़ा हुआ, और जाना हुआ […]
संजीवनी ज्ञानामृत :-“सत्य” भाषण वाणी का तप है, इससे “वाक सिद्धि” जैसी विभूतियाँ प्राप्त होती है, इसलिए सत्य भाषण का हर किसी को अभ्यास करना […]
संजीवनी ज्ञानामृत| “आत्मा” अनंत शक्तियों का भंडार होती हैं। संसार की ऐसी कोई भी शक्ति और सामर्थ्य नहीं, जो इस भंडार में न होती हो। […]
संजीवनी ज्ञानामृत| अपनी हर एक बाह्य परिस्थिति की जिम्मेदारी दूसरों पर मत डालिए, वरन् अपने ऊपर लीजिए। दुनिया को दर्पण के समान समझिए जिसमें अपनी […]
“शिष्टाचार” का मूल मंत्र है-“अपनी नम्रता और दूसरों का सम्मान” इस कसौटी पर जो जितना खरा उतरता है उसे उतना ही सभ्य-सुसंस्कृत समझा जायेगा। जो […]
अहंकार” के कारण न केवल मनुष्य जाति हिंसा तथा विनाश का शिकार हुई है बल्कि उसके कारण मनुष्य का नैतिक पतन भी हुआ है । […]
“सत्य” सदैव कल्याणकारी तथा शक्तिदायक होता है। सीधी-सच्ची और सही बात कह देने से मनुष्य की बहुत कम हानि होने की संभावना रहती है। ठीक […]
संपूर्ण मनुष्य जाति एक ही सूत्र में बंधी हुई है । विश्वव्यापी जीव तत्व एक है । आत्मा सर्वव्यापी है । जैसे एक स्थान पर […]
प्रसन्नता” संसार का सबसे बड़ा सुख है। जो प्रसन्न है, वह सुखी है और जो सुखी है, वह अवश्य प्रसन्न रहेगा। जिसके जीवन से प्रसन्नता […]
परिवार के प्रति हमें सच्चे अर्थों में कर्त्तव्यपरायण और उत्तरदायित्व निर्वाह करने वाला होना चाहिए। आज मोह के तमसाच्छन्न वातावरण में जहाँ बड़े लोग छोटों […]
“शरीर की स्वस्थता,” “मन का संतुलीकरण,” “परिवार की सुसंस्कारिता,” पुण्य-परमार्थ का संपादन,” “समाजगत सुव्यवस्था” आदि विषयों पर मनुष्य को आवश्यक ध्यान देना चाहिए और ठीक […]
“धैर्य” हमारे संकटकाल का मित्र है। इसी से हमें सांत्वना मिलती है। कैसी भी हानि या क्षति हो जाए, धैर्य उसे भुलाने का प्रयत्न करता […]
एक वृद्ध महिला एक सब्जी की दुकान पर जाती है, उसके पास सब्जी खरीदने के पैसे नहीं होते है। वो दुकानदार से *प्रार्थना* करती है […]
एक पेचीदा प्रश्न पर कुछ विचार-विमर्श करें। कई व्यक्तियों में साधारण योग्यताएँ होते हुए भी उनकी कीर्ति बहुत विस्तृत होती है और कईयों में अधिक […]
वस्तुतः अपराधों का क्रम न्यायसंहिता की परिधि की पहुँच से बहुत पहले प्रारंभ होता है । जिन कार्यों के लिए दंड संहिता में कोई व्यवस्था […]
जो जैसा सोचता और करता है, वह वैसा ही बन जाता है। मनुष्य का विकास और भविष्य उसके विचारों पर निर्भर है। जैसा बीज होगा, […]
“सद्विचारों” की महत्ता का अनुभव तो हम करते हैं, पर उन पर दृढ़ नहीं रह पाते। जब कोई अच्छी पुस्तक पढ़ते या सत्संग-प्रवचन सुनते हैं, […]
अनेक लोग एक छोटी-सी अप्रिय घटना या नगण्य सी हानि से व्यग्र हो उठते हैं और यहाँ तक व्याकुल हो उठते हैं कि जीवन का […]
“सद्गुणों” की मनुष्य में कभी नहीं है, जिसे बुरा या दुर्गुणी कहते हैं वह बेशक देव श्रेणी के सुसंस्कृत मनुष्यों से सात्विक गुणों में पीछे […]
मनुष्य कितना दीन-हीन, स्वल्प शक्ति वाला, कमजोर है । यह प्रतिदिन के जीवन से पता चलता है । उसे पग-पग पर परिस्थितियों के आश्रित होना […]
आरा/बिहार। महाजन टोली नंबर दो स्थित श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन पंचायती मंदिर प्रांगण में अष्टानिका महापर्व के मौके पर श्री नंदीश्वर महामंडल विधान बड़े ही […]
सबके कल्याण के लिए प्रार्थना करें। प्रार्थना” व्यक्तिगत एवं सामुदायिक दोनों प्रकार से की जा सकती है । व्यक्तिगत प्रार्थना से […]
दुःख में सुख खोज लेना, हानि में लाभ खोज लेना, प्रतिकूलताओं में भी अवसर खोज लेना इस सबको सकारात्मक दृष्टिकोण कहा जाता है। जीवन का […]
बहुत समय पहले की बात है, किसी नगर में एक बेहद प्रभावशाली स॔त रहते थे। उन के पास शिक्षा लेने हेतु कई शिष्य आते थे। […]
जैसे माया मन रमैं, यों जो रामरमाई। तारा मंडल वेधी के, जहां के सो तहां जाई। यह एक सामान्य सच्ची घटना है । किंतु हमारी […]
किसी स्थान पर संतों की एक सभा चल रही थी, किसी ने एक घड़े में गंगाजल भरकर वहां रखवा दिया ताकि संतजन को जब प्यास […]
आत्मा जब शरीर छोड़ती है तो मनुष्य को पहले ही पता चल जाता है । ऐसे में वह स्वयं भी हथियार डाल देता है अन्यथा […]
आत्मा जब शरीर छोड़ती है तो मनुष्य को पहले ही पता चल जाता है । ऐसे में वह स्वयं भी हथियार डाल देता है अन्यथा […]
महाभारत का युद्ध चल रहा था। अर्जुन के सारथी श्रीकृष्ण थे। . जैसे ही अर्जुन का बाण छूटता, कर्ण का रथ दूर तक पीछे चल […]
देवराज इंद्र और धर्मात्मा तोते की यह कथा महाभारत से है। कहानी कहती है, अगर किसी के साथ ने अच्छा वक्त दिखाया है तो बुरे […]
जीवन जोवत राज मद, अविचल रहे न कोय। जू दिन जाय सत्संग में, जीवन का फल सोए।। एक शिष्य अपने गुरु के पास आकर बोला, […]
भगवान श्री कृष्ण ने महाभारत के युद्ध में अर्जुन को गीता का उपदेश दिया और इसी उपदेश को सुनकर अर्जुन को ज्ञान की प्राप्ति हुई। […]
एक बार सात्यकि, बलराम एवं श्रीकृष्ण यात्रा कर रहे थे । यात्रा करते-करते रात हुई तो उन्होंने जंगल में पड़ाव डाला और ऐसा तय किया […]
ना भगवान, ना गृह-नक्षत्र, ना भाग्य, ना रिश्तेदार, ना पडोसी, ना सरकार, जिम्मेदार आप स्वयं है 1) आपका सरदर्द, फालतू विचार का परिणाम 2) पेट […]
एक बार देवर्षि नारद अपने शिष्य तुम्बरू के साथ मृत्युलोक का भ्रमण कर रहे थे। गर्मियों के दिन थे। गर्मी की वजह से वह पीपल […]
बहुत सुन्दर प्रश्न है, यदि हमसे अनजाने में कोई पाप हो जाए तो क्या उस पाप से मुक्ती का कोई उपाय है। श्रीमद्भागवत जी के […]
छोटी लड़की ने गुल्लक से सब सिक्के निकाले और उनको बटोर कर जेब में रख लिया, निकल पड़ी घर से – पास ही केमिस्ट की […]
“अनासक्त भाव से कर्म करना”। कर्म के सही स्वरूप का ज्ञान। कर्मयोग दो शब्दों से मिलकर बना है – ‘कर्म’ तथा ‘योग’ । कर्मयोग के […]
इसे जानने के लिए हमें उस शब्द पर विचार धारा करना है . उसमें प्रकृति और प्रत्यय रूप 2 शब्द हैं–भग + वान् . भग […]
भरतजी तो नंदिग्राम में रहते हैं, शत्रुघ्न जी महाराज उनके आदेश से राज्य संचालन करते हैं। . एक एक दिन रात करते करते, भगवान को […]
एक ब्राहम्ण था जो भगवान को भोग लगाये बिना खुद कभी भी भोजन नहीं करता था। . हर दिन पहले गोपाल जी के लिए खुद […]
गोपियां कहती हैं यदि मेरे लिए ठाकुर को थोड़ा सा भी श्रम उठाना पड़े तो हमारी भक्ति व्यर्थ है। इसीलिए भगवान से कुछ ना […]
कौशिक नामक एक ब्राह्मण बड़ा तपस्वी था। तप के प्रभाव से उसमें बहुत आत्म बल आ गया था। एक दिन वह वृक्ष के नीचे बैठा […]
सहजता से बढ़ कर जीवन को जीने का कोई दूसरा मूलमंत्र नहीं है। एक बहुत ज्ञानी व्यक्ति था। वो अपनी पीठ पर ज्ञान का भंडार […]
एक बार माता पार्वती ने भगवान शिव से कहा की प्रभु मैंने पृथ्वी पर देखा है कि जो व्यक्ति पहले से ही अपने प्रारब्ध से […]
*एक बार एक भक्त धनी व्यक्ति मंदिर जाता है।* *पैरों में महँगे और नये जूते होने पर सोचता है कि क्या करूँ?* *यदि बाहर […]
एक समय की बात है किसी गाँव में एक साधु रहता था, वह परमात्मा का बहुत बड़ा भक्त था और निरंतर एक पेड़ के नीचे […]
काफी समय पहले की बात है कि एक मन्दिर के बाहर बैठ कर एक भिखारी भीख माँगा करता था । ( वह एक बहुत बड़े […]
*एक राजा था जिसे शिल्प कला अत्यंत प्रिय थी। वह मूर्तियों की खोज में देस-परदेस जाया करता थे। इस प्रकार राजा ने कई मूर्तियाँ अपने […]
व्रत, भक्ति और शुभ कर्म के 4 महीने को हिन्दू धर्म में ‘चातुर्मास’ कहा गया है। ध्यान और साधना करने वाले लोगों के लिए ये […]
हिंदू धर्म में श्रीमद्भागवत कथा को कितना महत्व दिया जाता है, कोई इस बात से अंजान नहीं है। इसकी महत्ता को देखते हुए ही लगभग […]
भारत में नागकुल और नागों के रहस्य को सुलझाना अत्यंत ही कठिन है। क्या पहले सर्पमानव होते थे या कि सर्प जातियों के नाम के […]
*कन्यादान शब्द पर समाज में गलतफहमी पैदा हो गई है*, *और अकारण भ्रांतियां उत्पन्न की गयी हैं,* *” समाज को यह समझने की जरूरत है […]
भगवती दुर्गा की दस महाविद्याओं में से एक हैं महाकाली। जिनके काले और डरावने रूप की उत्पति राक्षसों का नाश करने के लिए हुई थी। […]
एक मेजर के नेतृत्व में 15 जवानों की एक टुकड़ी हिमालय के अपने रास्ते पर थी उन्हें ऊपर कहीं अगले तीन महीने के लिए दूसरी […]
एक ऐसे संत जिसके पैरो के नीचे अपना सिर रखने नेता व अंग्रेज तक आते थे!! देवरहा बाबा का जन्म अज्ञात है। यहाँ तक […]
ये बात उस समय की है जब महाभारत का युद्ध समाप्त होने के बाद पांडवो ने अश्मेघ यज्ञ किया ! . भगवान् श्रीकृष्ण जी ने […]
एक राजा था जिसने ने अपने राज्य में क्रूरता से बहुत सी दौलत इकट्ठा करके( एकतरह शाही खजाना ) आबादी से बाहर जंगल एक सुनसान […]
*एक सेठ बड़ा धार्मिक था संपन्न भी था। एक बार उसने अपने घर पर पूजा पाठ रखी और पूरे शहर को न्यौता दिया। पूजा पाठ […]
*एक बार भगवान राम और लक्ष्मण दोनों भाई एक सरोवर में स्नान के लिए उतरे । उतरते समय उन्होंने अपने-अपने धनुष बाहर तट पर गाड़ […]
वशिष्ठ और विश्वामित्र के बीच श्रेष्ठता का निर्णय इसी गुण ने तो किया था। ब्रह्मा जी विश्वामित्र के घोर तप से प्रसन्न होकर प्रकट हुए […]
मनुष्य को ऐसी शंका नहीं करनी चाहिये कि मेरा पाप तो कम था पर दण्ड अधिक भोगना पडा अथवा मैंने पाप तो किया नहीं पर […]
*लंका में महा बलशाली मेघनाद के साथ बड़ा ही भीषण युद्ध चला. अंतत: मेघनाद मारा गया. रावण जो अब तक मद में चूर था राम […]
‼️ *गायत्री मंत्र* ‼️ गायत्री मंत्र ऋग्वेद का सबसे श्रद्धेय व महत्वपूर्ण मंत्र है। गायत्री मंत्र मानव जाति की सबसे महत्वपूर्ण प्रार्थनाओं में से एक […]
एक बार की बात है – वृंदावन का एक साधू अयोध्या की गलियों में राधे कृष्ण – राधे कृष्ण जप रहा था । अयोध्या का […]
*तुलसी चिन्ता क्यौं करे,भज ले श्री रघुवीर।।* एक गुरूजी थे । हमेशा ईश्वर के नाम का जाप किया करते थे । काफी बुजुर्ग हो गये […]
गुरु जी – एक नगर मे एक बहुत ही आलीशान भवन बना हुआ था उस भवन मे एक सेठजी रहते थे । दो खाली कमरे […]
एक बार महाराज दशरथ राम आदि के साथ गंगा स्नान के लिये जा रहे थे। मार्ग में देवर्षि नारद जी से उनकी भेंट हो गयी। […]
गुरु जी – एक नगर मे एक बहुत ही आलीशान भवन बना हुआ था उस भवन मे एक सेठजी रहते थे। दो खाली कमरे थे […]
जानिएः- ये तो आपको पता होगा की हमारे जगत पालक भगवान विष्णु को ‘नारायण’ के नाम से भी पुकारा जाता है। ये सांसारिक जीवन के […]
एक जंगल के दोनों ओर अलग-अलग राजाओं का राज्य था. और उसी जंगल में एक महात्मा रहते थे जिन्हे दोनों राजा अपना गुरु मानते थे. […]
एक जादूगर जो मृत्यु के करीब था, मृत्यु से पहले अपने बेटे को चाँदी के सिक्कों से भरा थैला देता है और बताता है की […]
एक शिष्य था समर्थ गुरु रामदास जी का जो भिक्षा लेने के लिए गांव में गया और घर-घर भिक्षा की मांग करने लगा। *समर्थ गुरु […]
श्रीकृष्ण सच्चिदानन्दघन परब्रह्म परमात्मा हैं । यह सारा संसार उन्हीं की आनन्दमयी लीलाओं का विलास है । श्रीकृष्ण की लीलाओं में हमें उनके ऐश्वर्य के […]
मथुरा से गोकुल में सुखिया नाम की मालिन फूल फल बेचने आया करती थी। जब वह गोकुल में गोपियों के घर जाया करती तो हमेशा […]
बनारस में उस समय कथावाचक व्यास डोगरे जी का जमाना था। बनारस का वणिक समाज उनका बहुत सम्मान करता था। वो चलते थे तो एक […]
काशी में एक जगह पर तुलसीदास रोज रामचरित मानस को गाते थे वो जगह थी अस्सीघाट। उनकी कथा को बहुत सारे भक्त सुनने आते थे। […]
दान से अक्षय पुण्य प्राप्त होता है और साथ ही जाने-अनजाने में किए गए पाप कर्मों के फल भी नष्ट हो जाते हैं। शास्त्रों में […]
बाल कृष्ण की लीलाए बड़ी मनमोहनी है, बड़े-बड़े ऋषि मुनि भी भगवान श्री कृष्ण की इन लीलाओ का चिंतन करते रहते है और इन्ही लीलाओ […]
एक बार की बात है वीणा बजाते हुए नारद मुनि भगवान श्रीराम के द्वार पर पहुँचे *नारायण नारायण !!* *नारदजी ने देखा कि द्वार पर […]
रामजी लंका पर विजय प्राप्त करके आए तो, भगवान ने विभीषण जी, जामवंत जी, अंगद जी, सुग्रीव जी सब को अयोध्या से विदा किया। तो […]
कलियुग केवल नाम अधारा। संतों ने कहा है—कलियुग तुम धन्य हो ! क्यों धन्य है ? इसका उत्तर इस पद में दिया गया है— कलियुग […]
दान से अक्षय पुण्य प्राप्त होता है और साथ ही जाने-अनजाने में किए गए पाप कर्मों के फल भी नष्ट हो जाते हैं। .शास्त्रों में […]
प्रभु श्री कृष्ण जी को अर्जुन सबसे प्रिय इसलिए थे कि वो नर के अवतार थे और श्री कृष्ण स्वयं नारायण थे। आपने नर और […]
विद्यावान गुनी अति चातुर । राम काज करिबे को आतुर ॥ एक होता है विद्वान और एक विद्यावान । दोनों में आपस में बहुत अन्तर […]
*🐢एक कछुआ भगवान विष्णु का बड़ा अनन्य भक्त था. एक बार गंगासागर स्नान को आए कुछ ऋषियों के मुख से उसने श्रीहरि के चरणों की […]
गंगा सागर को तीर्थों का पिता कहा जाता है, कहने का तात्पर्य है कि गंगा सागर का अन्य तीर्थों की अपेक्षा अत्यधिक महत्व है। शायद […]
एक समय की बात है। एक पंडित जी कई वर्षों तक काशी में शास्त्रों का अध्ययन करने के बाद गांव लौटे। […]
संसार को विषवृक्ष कहा गया है, उसमें आपत्तियाँ भी कम नहीं हैं । यहाँ यंत्रवत् सब कुछ चलता है।* *”दूर रहते हुए और न चाहते […]
वैश्विक महामारी कोविड -19 अपने चरम पर नित रोज अनगिनत शवों का आहार लें रहा है ! उसका भूखा और मोटा पेट आसानी से भरने […]
एक राजा ने दो लोगों को मौत की सजा सुनाई l उसमें से एक यह जानता था कि राजा को अपने घोड़े से बहुत ज्यादा […]
भगवान गणेश को समृद्धि, बुद्धि और अच्छे भाग्य का देवता माना जाता है। भगवान गणेश, सर्वशक्तिमान माने जाते है। माना जाता है कि भगवान गणेश, […]
एक साधु वर्षा के जल में प्रेम और मस्ती से भरा चला जा रहा था,कि उसने एक मिठाई की दुकान को देखा जहां एक कढ़ाई […]
अन्य सभी देवताओं के समान भगवान गणेश ने भी आसुरी शक्तियों के विनाश के लिए विभिन्न अवतार लिए। श्रीगणेश के इन अवतारों का वर्णन गणेश […]
एक बार सुमेरु पर्वत पर बैठे हुए ब्रम्हाजी के पास जाकर देवताओं ने उनसे अविनाशी तत्व बताने का अनुरोध किया शिवजी की माया से मोहित […]
एक बार बड़े-बड़े ऋषि-मुनि एक जगह जुटे तो इस बात पर विचार होने लगा कि कौन सा युग सबसे बढिया है. बहुतों ने कहा सतयुग, […]
एक गाँव में एक बूढ़ी माई रहती थी । माई का आगे – पीछे कोई नहीं था इसलिए बूढ़ी माई बिचारी अकेली रहती थी । […]
“त्रेता में जब जन्मे श्रीराम” ग्रंथों में उल्लेख मिलता है कि त्रेतायुग में जब भगवान श्रीराम का जन्म हुआ तो एक दिन भोलेनाथ ने माता […]
१–कहाँ से आई चूडा मणि ? २–किसने दी सीता जी को चूडामणि ? ३–क्यों दिया लंका में हनुमानजी को सीता जी ने चूडामणि ? ४–कैसे […]
एक कथा के अनुसार कुरुक्षेत्र के युद्धक्षेत्र को विशाल सेनाओं के आवागमन की सुविधा के लिए तैयार किया जा रहा था। उन्होंने हाथियों का इस्तेमाल […]
एक बार तुलसीदास जी महाराज को किसी ने बताया की जगन्नाथ जी मैं तो साक्षात भगवान ही दर्शन देते हैं बस फिर क्या था सुनकर […]
कथा का आरंभ तब का है जब बाली को ब्रम्हा जी से ये वरदान प्राप्त हुआ ! जो भी उससे युद्ध करने उसके सामने आएगा, […]
द्रौपदी के स्वयंवर में जाते वक्त “श्री कृष्ण” ने अर्जुन को समझाते हुए कहते हैं कि, हे पार्थ तराजू पर पैर संभलकर रखना, संतुलन बराबर […]
लंका में महा बलशाली मेघनाद के साथ बड़ा ही भीषण युद्ध चला. अंतत: मेघनाद मारा गया. रावण जो अब तक मद में चूर था राम […]
राम,लखन,भरत,शत्रुघ्न चारों भाईयों के बचपन का एक प्रसंग है….. जब ये लोग गेंद खेलते थे। तो लक्ष्मण राम की साइड उनके पीछे होते थे और […]
एक बार भगवान विष्णु गरुड़जी पर सवार होकर कैलाश पर्वत पर जा रहे थे। रास्ते में गरुड़जी ने देखा कि एक ही दरवाजे पर दो […]
एक बार एक गाँव में पंचायत लगी थी। वहीं थोड़ी दूरी पर एक सन्त ने अपना बसेरा किया हुआ था। […]
मोक्ष का अर्थ होता है मुक्ति। अधिकतर लोग समझते हैं कि मोक्ष का अर्थ जीवन-मरण के चक्र से मुक्ति। बहुत से लोग मानते हैं कि […]
*’एक’ सेठ जी भगवान “श्रीकृष्ण” जी के परम भक्त थे। वे निरंतर उनका जाप करते और सदैव उनको अपने अन्तःकरण में बसाए रखते थे।* *वो […]
एक गुरूजी थे । हमेशा ईश्वर के नाम का जाप किया करते थे । काफी बुजुर्ग हो गये थे । उनके कुछ शिष्य साथ मे […]
एकटक देर तक उस सुपुरुष को निहारते रहने के बाद बुजुर्ग भीलनी के मुह से बोल फूटे- कहो राम! सबरी की डीह ढूंढने में अधिक […]
एक बार महर्षि नारद धर्म के ज्ञान का प्रचार करते हुए किसी सघन बन में जा पहुँचे। वहाँ उन्होंने एक बहुत बड़ा घनी छाया वाला […]
एक गांव में एक बहुत समझदार और संस्कारी औरत रहती थी… एक बार वह अपने बेटे के साथ सुबह-सुबह कहीं जा रही थी तभी एक […]
एक गांव में एक बहुत समझदार और संस्कारी औरत रहती थी… एक बार वह अपने बेटे के साथ सुबह-सुबह कहीं जा रही थी तभी एक […]
दुःख ईश्वर का प्रसाद है। जब भगवान(गुरुदेव) सृष्टि की रचना कर रहे तो उन्होंने जीव को कहा कि तुम्हे मृतुलोक जाना पड़ेगा,मैं सृष्टि की रचना […]
एक बार देवर्षि नारद श्रीं हरि विष्णु के पास गए और प्रणाम करते हुए बोले, “हे जगत के पालन हार मुझे सत्संग की महिमा सुनाइये।” […]
मृत्यु के बाद शरीर से आत्मा कहां जाती है? क्या करती है? नर्क और स्वर्ग का सफर किस तरह से तय करती है? रहस्य। यह बातें आज […]
भोजपुर/बिहार। अखिल भारतीय जन संघ द्वारा कहा गया की ये संघ सच्चाई की बात करता है सच्चाई की राजनीति करता है। अखिल भारतीय जनसंघ का […]
