भागवत कथा

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Ramcharitar Mans

रामचरित मानस (हिन्दी का वैश्विक दूत)

(1) भारतीय मूल के आप्रवासियों की संस्कृतिक चेतना को रामचरित मानस अनुप्राणित कर रहा है। (2) जीवन में मूल्यों की प्रतिष्ठा की चाह में हर […]

विशेषता होगी, तभी पराए अपने बन जाएँगे और शत्रुओं को मित्र । DntvIndiaNews

 सद्गुण” बढ़ाएं, “सुसंस्कृत” बनें मनुष्य के पास सबसे बड़ी पूजा सद्गुणों की है। जिसके पास जितने सद्गुण हैं, वह उतना ही बड़ा अमीर है। धन […]

श्रमशीलता” का सम्मान करें| माघ कृष्णपक्ष एकादशी 2082

यदि “श्रम” का सत्परिणाम सुनिश्चित न होता तो कोई क्यों श्रमशीलता का कष्टसाध्य मार्ग अपनाता ?  कृषि, व्यापार, शिल्प, शिक्षा आदि में करोड़ों आदमी निरंतर […]

गीता के 18 अध्याय संक्षिप्त में जाने / माघ कृष्णपक्ष नवमी 2080

भगवान श्री कृष्ण ने महाभारत के युद्ध में अर्जुन को गीता का उपदेश दिया और इसी उपदेश को सुनकर अर्जुन को ज्ञान की प्राप्ति हुई। […]

शुद्ध भक्ति /गलती और “गलत” में एक छोटा सा अंतर| Gyan Ganga में पढ़े कहानिया |

“गलती और “गलत” में एक छोटा सा अंतर होता है – नीयत का। समय बहरा है किसी की नहीं सुनता लेकिन वह अंधा नहीं है […]

GyanGanga: प्रेम है और धर्म है, राम आदि और राम ही अन्त हैं, कैसे पुकारू तोहे राम कहें या श्री राम, यही सवाल हृदय में है …

 राम भारत के इष्ट हैं, आत्मा हैं, आदर्श हैं, पुरोधा हैं, संस्कृति के वाहक हैं। राम भारत के पिता हैं। राम निरीह में हैं, राम […]

जो दूसरों के लिए सोचता है। परमात्मा स्वयं उसके लिए करतें है।

 सत्संग कथा: एक माँ थी उसका एक बेटा था। माँ-बेटे बड़े गरीब थे। एक दिन माँ ने बेटे से कहा – बेटा !! यहाँ से […]

बाहर की सृष्टि कैसी,हमारी दृष्टि जैसी”/माघ कृष्णपक्ष प्रतिपदा 2080

संजीवनी ज्ञानामृत| भलाई, उत्कृष्टता, स्वच्छता आदि सब ईश्वर प्रकृति, नैतिक विधान की धरती पर मिलती हैं; वे अनादि हैं, स्थिर हैं, अनंत हैं। सृष्टि की […]

सद्विचारों की सतत बहने वाली गंगोत्री | पौषमाह शुक्लपक्ष पूर्णिमा 2080 /25 जनवरी 2024 गुरुवार|

संजीवनी ज्ञानामृत | “सद्विचारों” की महत्ता का अनुभव तो हम करते हैं, पर उन पर दृढ़ नहीं रह पाते। जब कोई अच्छी पुस्तक पढ़ते या […]

सहायक सचिव, लॉयर्स एसोसिएशन सह-संयोजक, भाजपा, विधि प्रकोष्ठ डॉ. मन्टु कुमार की संदेश व शुभकामनाएं। 23-01

श्रीरामः शरणं समस्तजगतां रामं विना का गती, रामेण प्रतिहन्यते कलिमलं रामाय कार्यं नमः। रामात् त्रस्यति कालभीमभुजगो रामस्य सर्वं वशे, रामे भक्तिरखण्डिता भवतु मे राम! त्वमेवाश्रयः।। […]

दृष्टिकोण” २३ जनवरी २०२४ मंगलवार/पौषमाह शुक्लपक्ष त्रयोदशी २०८०

दृष्टिकोण की विकृतियाँ हमें अकारण उलझनों में पटकती और खिन्न रहने के लिए विवश करती हैं। हम गरीब हैं या अमीर इसका निर्णय दूसरों के […]

आत्मविश्वास ⚜️ एक चमत्कारिक शक्ति ।

संजीवनी ज्ञानामृत। जब संसार में सभी साथी मनुष्य का साथ छोड़ दें, पराजय और पीड़ाओं के दंश मनुष्य को घायल कर दें, पैरों के नीचे […]

अपने अंदर आत्मभाव बढ़ाइए।

संजीवनी ज्ञानामृत। आत्मभाव” का प्रयास करिए, इससे आसपास की रूखी, उपेक्षणीय, अप्रिय वस्तुओं का रूप बिलकुल बदल जाएगा।  विज्ञ लोग कहते हैं कि अमृत छिड़कने […]

इस जल्दबाजी से क्या फायदा।

संजीवनी ज्ञानामृत। “आतुरता” और “अधीरता” की बुराई मनुष्य को बुरी तरह परेशान करती है। प्रायः हमें हर बात में बहुत जल्दी रहती है, जिस कार्य […]

संसार की सर्वोपरि शक्ति-आत्मीयता।

संसार में दो प्रकार के मनुष्य होते हैं, एक वे जो “शक्तिशाली” होते हैं, जिनमें “अहंकार” की प्रबलता होती है।  शक्ति के बल पर वे […]

प्रार्थना में अतुलनीय बल / पौषमाह कृष्णपक्ष चतुर्थी।

संजीवनी ज्ञानामृत। मनुष्य कितना दीन-हीन, स्वल्प शक्ति वाला, कमजोर है । यह प्रतिदिन के जीवन से पता चलता है ।  उसे पग-पग पर परिस्थितियों के […]

आत्मीय व सांसारिक चिंतन/28Dec23 गुरुवार/पौषमाह कृष्णपक्ष द्वितीया २०८०-

संजीवनी ज्ञानामृत:- हम कितना भी भजन कर लें, ध्यान कर लें लेकिन हमारा संग अगर गलत है तो सुना हुआ, पढ़ा हुआ, और जाना हुआ […]

मार्गशीर्ष शुक्लपक्ष पूर्णिमा २०८० / सत्य को सम्मान के साथ अपनाइए |

संजीवनी ज्ञानामृत :-“सत्य” भाषण वाणी का तप है, इससे “वाक सिद्धि” जैसी विभूतियाँ प्राप्त होती है, इसलिए सत्य भाषण का हर किसी को अभ्यास करना […]

आत्मा में अनंत विश्वास / अर्थात -आत्मविश्वास |

संजीवनी ज्ञानामृत| “आत्मा” अनंत शक्तियों का भंडार होती हैं। संसार की ऐसी कोई भी शक्ति और सामर्थ्य नहीं, जो इस भंडार में न होती हो। […]

आपकी असफलता के लिए / दूसरे ही दोषी क्यों हैं ?

संजीवनी ज्ञानामृत| अपनी हर एक बाह्य परिस्थिति की जिम्मेदारी दूसरों पर मत डालिए, वरन् अपने ऊपर लीजिए।  दुनिया को दर्पण के समान समझिए जिसमें अपनी […]

मार्गशीर्ष शुक्लपक्ष प्रतिपदा”संजीवनी ज्ञानामृत”शिष्टाचार” की पाठशाला – “परिवार”

“शिष्टाचार” का मूल मंत्र है-“अपनी नम्रता और दूसरों का सम्मान” इस कसौटी पर जो जितना खरा उतरता है उसे उतना ही सभ्य-सुसंस्कृत समझा जायेगा। जो […]

संजीवनी ज्ञानामृतअसत्य भाषण से अपार हानि

“सत्य” सदैव कल्याणकारी तथा शक्तिदायक होता है। सीधी-सच्ची और सही बात कह देने से मनुष्य की बहुत कम हानि होने की संभावना रहती है। ठीक […]

संजीवनी ज्ञानामृत, समाज में बढ़ती दुष्प्रवृत्तियाँ / हमारी जिम्मेदारी कितनी ?

संपूर्ण मनुष्य जाति एक ही सूत्र में बंधी हुई है । विश्वव्यापी जीव तत्व एक है । आत्मा सर्वव्यापी है । जैसे एक स्थान पर […]

संजीवनी ज्ञानामृत/प्रसन्न” रहना ईश्वर की कृपा।

प्रसन्नता” संसार का सबसे बड़ा सुख है। जो प्रसन्न है, वह सुखी है और जो सुखी है, वह अवश्य प्रसन्न रहेगा। जिसके जीवन से प्रसन्नता […]

१४ नवम्बर २०२३ मंगलवार/कार्तिक शुक्लपक्ष प्रतिपदा २०८०/संजीवनी ज्ञानामृत‼️/मोहग्रस्त नहीं, विवेकवान बनें।

परिवार के प्रति हमें सच्चे अर्थों में कर्त्तव्यपरायण और उत्तरदायित्व निर्वाह करने वाला होना चाहिए।  आज मोह के तमसाच्छन्न वातावरण में जहाँ बड़े लोग छोटों […]

धन” से महत्वपूर्ण भी बहुत कुछ है।

“शरीर की स्वस्थता,” “मन का संतुलीकरण,” “परिवार की सुसंस्कारिता,” पुण्य-परमार्थ का संपादन,” “समाजगत  सुव्यवस्था” आदि विषयों पर मनुष्य को आवश्यक ध्यान देना चाहिए और ठीक […]

धैर्य एक बहुमूल्य और विलक्षण गुण कैसे ?

“धैर्य” हमारे संकटकाल का मित्र है। इसी से हमें सांत्वना मिलती है। कैसी भी हानि या क्षति हो जाए, धैर्य उसे भुलाने का प्रयत्न करता […]

आश्विन शुक्लपक्ष तृतीया २०८०-संजीवनी ज्ञानामृत | अपने सदगुणों को प्रकाशित होने दें|

एक पेचीदा प्रश्न पर कुछ विचार-विमर्श करें। कई व्यक्तियों में साधारण योग्यताएँ होते हुए भी उनकी कीर्ति बहुत विस्तृत होती है और कईयों में अधिक […]

सामाजिक अपराधों ➖के लिए➖ हम भी परोक्ष रूप से जिम्मेदार |

वस्तुतः अपराधों का क्रम न्यायसंहिता की परिधि की पहुँच से बहुत पहले प्रारंभ  होता है ।  जिन कार्यों के लिए दंड संहिता में कोई व्यवस्था […]

१२ अक्टूबर २०२३ गुरुवार /आश्विन कृष्णपक्ष त्रयोदशी २०८०-विचार शक्ति को परिष्कृत कीजिए| संजीवनी ज्ञानामृत|

जो जैसा सोचता और करता है, वह वैसा ही बन जाता है। मनुष्य का विकास और भविष्य उसके विचारों पर निर्भर है। जैसा बीज होगा, […]

सद्विचारों की सतत बहने वाली गंगोत्री।

“सद्विचारों” की महत्ता का अनुभव तो हम करते हैं, पर उन पर दृढ़ नहीं रह पाते। जब कोई अच्छी पुस्तक पढ़ते या सत्संग-प्रवचन सुनते हैं, […]

श्रावण/कृष्णपक्ष चतुर्थी/पंचमी‼️संजीवनी ज्ञानामृत‼️ अपने सदगुणों को प्रकाश में लाइए।

“सद्गुणों” की मनुष्य में कभी नहीं है, जिसे बुरा या दुर्गुणी कहते हैं वह बेशक देव श्रेणी के सुसंस्कृत मनुष्यों से सात्विक गुणों में पीछे […]

प्रथम श्रावण❗ कृष्णपक्ष प्रतिपदा २०८०/संजीवनी ज्ञानामृत‼️ प्रार्थना में अतुलनीय बल है|

मनुष्य कितना दीन-हीन, स्वल्प शक्ति वाला, कमजोर है । यह प्रतिदिन के जीवन से पता चलता है । उसे पग-पग पर परिस्थितियों के आश्रित होना […]

जैन धर्मावलंबियों के द्वारा अष्टानिका महापर्व पर श्री नंदीश्वर महामंडल विधान का आयोजन।

आरा/बिहार। महाजन टोली नंबर दो स्थित श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन पंचायती मंदिर प्रांगण में अष्टानिका महापर्व के मौके पर श्री नंदीश्वर महामंडल विधान बड़े ही […]

*🥀// ०२ जुलाई २०२३ रविवार //🥀**//आषाढ़ शुक्लपक्ष चतुर्दशी २०८०//‼️संजीवनी ज्ञानामृत‼️

सबके कल्याण के लिए प्रार्थना करें।           प्रार्थना” व्यक्तिगत एवं सामुदायिक दोनों प्रकार से की जा सकती है । व्यक्तिगत प्रार्थना से […]

*‼️आज का अमृत‼️*‼️भगवान में मन क्युं नहीं लगता‼️*

जैसे माया मन रमैं,  यों जो रामरमाई। तारा मंडल वेधी के, जहां के सो तहां जाई। यह एक सामान्य सच्ची घटना है । किंतु हमारी […]

‼️आज का अमृत‼️ ‼️बड़ अधिकार दच्छ जब पावा,‼️*‼️अति अभीमांनु ह्रदय तब आवा।‼️**‼️नही कोऊ अस जन्मा जग माही,‼️**‼️प्रभुता पाई जाहि मद नाही।।‼️*

महाभारत का युद्ध चल रहा था।   अर्जुन के सारथी श्रीकृष्ण थे।  .  जैसे ही अर्जुन का बाण छूटता,  कर्ण का रथ दूर तक पीछे चल […]

आज का अमृत‼️⛳गीता जी के 18 अध्यायों का संक्षेप में सारांश

भगवान श्री कृष्ण ने महाभारत के युद्ध में अर्जुन को गीता का उपदेश दिया और इसी उपदेश को सुनकर अर्जुन को ज्ञान की प्राप्ति हुई। […]

आज का अमृत‼️🌿‼️प्रसन्नता से क्रोध चला जाता है?

एक बार सात्यकि, बलराम एवं श्रीकृष्ण यात्रा कर रहे थे । यात्रा करते-करते रात हुई तो उन्होंने जंगल में पड़ाव डाला और ऐसा तय किया […]

आज का अमृत‼️🌿‼️ ‼️जीवन मे दुःखो के लिए कौन जिम्मेदार है ? ‼️

 ना भगवान, ना गृह-नक्षत्र, ना भाग्य, ना रिश्तेदार, ना पडोसी, ना सरकार, जिम्मेदार आप स्वयं है 1) आपका सरदर्द, फालतू विचार का परिणाम 2) पेट […]

आज का अमृत‼️🌿/‼️ रिश्ते मृत्यु के साथ मिट जाते है ? ‼️

एक बार देवर्षि नारद अपने शिष्य तुम्बरू के साथ मृत्युलोक का भ्रमण कर रहे थे। गर्मियों के दिन थे। गर्मी की वजह से वह पीपल […]

अनजाने में किये हुये पाप का प्रायश्चित कैसे होता है…?‼️

बहुत सुन्दर प्रश्न है, यदि हमसे अनजाने में कोई पाप हो जाए तो क्या उस पाप से मुक्ती का कोई उपाय है। श्रीमद्भागवत जी के […]

Covid-19) जब माता पार्वती ने बनाया भोजन तो शिवजी ने उन्हें बताई ये अनोखी बात।‼️

एक बार माता पार्वती ने भगवान शिव से कहा की प्रभु मैंने पृथ्वी पर देखा है कि जो व्यक्ति पहले से ही अपने प्रारब्ध से […]

Covid-19 ) भागवत कथा सुनने की परंपरा का प्रारंभ कब से है।

हिंदू धर्म में श्रीमद्भागवत कथा को कितना महत्व दिया जाता है, कोई इस बात से अंजान नहीं है। इसकी महत्ता को देखते हुए ही लगभग […]

Covid-19 ) भगवान शिव के गले में लिपटे नाग का नाम और अन्य रहस्य जानिए

भारत में नागकुल और नागों के रहस्य को सुलझाना अत्यंत ही कठिन है। क्या पहले सर्पमानव होते थे या कि सर्प जातियों के नाम के […]

Covid-19 ) क्यों आए भगवान शिव, महाकाली के पैरों के नीचे?

भगवती दुर्गा की दस महाविद्याओं में से एक हैं महाकाली। जिनके काले और डरावने रूप की उत्पति राक्षसों का नाश करने के लिए हुई थी। […]

Covid-19 ) ‼️आज का अमृत‼️ क्षमादान से बडा कोई यज्ञ नहीं।

वशिष्ठ और विश्वामित्र के बीच श्रेष्ठता का निर्णय इसी गुण ने तो किया था। ब्रह्मा जी विश्वामित्र के घोर तप से प्रसन्न होकर प्रकट हुए […]

Covid-19 ) *गायत्री मंत्र के बारे में संपूर्ण ज्ञान*

‼️ *गायत्री मंत्र* ‼️ गायत्री मंत्र ऋग्वेद का सबसे श्रद्धेय  व महत्वपूर्ण मंत्र है। गायत्री मंत्र मानव जाति की सबसे महत्वपूर्ण प्रार्थनाओं में से एक […]

Covid-19 ) किस कारण से भगवान विष्णु को ‘नारायण’ के नाम से पुकारते है।

जानिएः- ये तो आपको पता होगा की हमारे जगत पालक भगवान विष्णु को ‘नारायण’ के नाम से भी पुकारा जाता है। ये सांसारिक जीवन के […]

Covid-19 ) श्रीकृष्ण अपने पैर का अंगूठा क्यों पीते थे?

श्रीकृष्ण सच्चिदानन्दघन परब्रह्म परमात्मा हैं । यह सारा संसार उन्हीं की आनन्दमयी लीलाओं का विलास है । श्रीकृष्ण की लीलाओं में हमें उनके ऐश्वर्य के […]

Covid-19 ) माता यशोदा का बाल गोपाल को श्रीराम कथा सुनाना।

बाल कृष्ण की लीलाए बड़ी मनमोहनी है, बड़े-बड़े ऋषि मुनि भी भगवान श्री कृष्ण की इन लीलाओ का चिंतन करते रहते है और इन्ही लीलाओ […]

Covid-19 ) कलियुग केवल नाम अधारा / संतों ने कहा है—कलियुग तुम धन्य हो ! क्यों धन्य है ? इसका उत्तर इस पद में दिया गया है। पढ़े विस्तार से।

कलियुग केवल नाम अधारा। संतों ने कहा है—कलियुग तुम धन्य हो ! क्यों धन्य है ? इसका उत्तर इस पद में दिया गया है— कलियुग […]

Covid-19 ) सारे तीरथ बार-बार गंगा सागर एक बार जाने क्यों।

गंगा सागर को तीर्थों का पिता कहा जाता है, कहने का तात्पर्य है कि गंगा सागर का अन्य तीर्थों की अपेक्षा अत्यधिक महत्व है। शायद […]

Covid-19 } हम गणेश भगवान की पूजा क्‍यों करते है।

भगवान गणेश को समृद्धि, बुद्धि और अच्‍छे भाग्‍य का देवता माना जाता है। भगवान गणेश, सर्वशक्तिमान माने जाते है। माना जाता है कि भगवान गणेश, […]

Covid-19 } भगवान श्रीगणेश के आठ अवतारो की कथा।

 अन्य सभी देवताओं के समान भगवान गणेश ने भी आसुरी शक्तियों के विनाश के लिए विभिन्न अवतार लिए। श्रीगणेश के इन अवतारों का वर्णन गणेश […]

Covid-19 } भगवान शंकर के पूर्ण रूप काल भैरव।

एक बार सुमेरु पर्वत पर बैठे हुए ब्रम्हाजी के पास जाकर देवताओं ने उनसे अविनाशी तत्व बताने का अनुरोध किया शिवजी की माया से मोहित […]

Covid-19} हनुमान जी के अमर होने की पूरी कहानी।

 “त्रेता में जब जन्‍मे श्रीराम” ग्रंथों में उल्‍लेख मिलता है कि त्रेतायुग में जब भगवान श्रीराम का जन्‍म हुआ तो एक दिन भोलेनाथ ने माता […]

श्री कृष्ण का लॉकडाउन।

एक कथा के अनुसार कुरुक्षेत्र के युद्धक्षेत्र को विशाल सेनाओं के आवागमन की सुविधा के लिए तैयार किया जा रहा था। उन्होंने हाथियों का इस्तेमाल […]

DNtv इंसान और विधाता में अंतर ‎।

द्रौपदी के स्वयंवर में जाते वक्त “श्री कृष्ण” ने अर्जुन को समझाते हुए कहते हैं कि,  हे पार्थ तराजू पर पैर संभलकर रखना,  संतुलन बराबर […]

dntv भाई-भाई की “विपत्ति” बांटने के लिए होते हैं न की “सम्पति” का बंटवारा करने के लिए।

राम,लखन,भरत,शत्रुघ्न चारों भाईयों के बचपन का एक प्रसंग है….. जब ये लोग गेंद खेलते थे। तो लक्ष्मण राम की साइड उनके पीछे होते थे और […]

मोक्ष क्या है, और कैसे प्राप्त होता है/आइए, जानते हैं कि क्या यह सही है।

मोक्ष का अर्थ होता है मुक्ति। अधिकतर लोग समझते हैं कि मोक्ष का अर्थ जीवन-मरण के चक्र से मुक्ति। बहुत से लोग मानते हैं कि […]

‼️ *प्रारब्ध पहले रचा,पीछे रचा शरीर।* ‼️ *तुलसी चिन्ता क्यौं करे,भज ले श्री रघुवीर।।*

एक गुरूजी थे । हमेशा ईश्वर के नाम का जाप किया करते थे । काफी बुजुर्ग हो गये थे । उनके कुछ शिष्य साथ मे […]

संयम का परिचय, ऐसे समय में गुस्सा होकर अपना साफ-सुथरा मन क्यों खराब करना ?

एक गांव में एक बहुत समझदार और संस्कारी औरत रहती थी… एक बार वह अपने बेटे के साथ सुबह-सुबह कहीं जा रही थी तभी एक […]

पहला संसार की हर चीज़ मे अतृप्ति मिला दी, कि तुझे दुनिया मे कुछ भी मिल जाये तू तृप्त नहीं होगा।

दुःख ईश्वर का प्रसाद है। जब भगवान(गुरुदेव) सृष्टि की रचना कर रहे तो उन्होंने जीव को कहा कि तुम्हे मृतुलोक जाना पड़ेगा,मैं सृष्टि की रचना […]

शरीर छोड़ने के बाद 47 दिनों तक क्यों भटकती है आत्मा?

मृत्यु के बाद शरीर से आत्मा कहां जाती है? क्या करती है? नर्क और स्वर्ग का सफर किस तरह से तय करती है?  रहस्य। यह बातें आज […]