श्रद्धा, भक्ति, विश्वास और संकल्प का आध्यात्मिक अर्थ क्या है? जानिए अंतःकरण की शक्ति और जीवन में संकल्प की भूमिका।
ज्ञान की बात
जानिए रामायण की वह अद्भुत कथा जिसमें लक्ष्मण की तपस्या के कारण केवल वही मेघनाद (इंद्रजीत) का वध कर सके। पूरी कहानी पढ़ें।
मंगलवार को तिल खाना शुभ है या अशुभ? जानिए हनुमान जी से जुड़ी धार्मिक मान्यता और स्वास्थ्य के नजरिए से पूरी सच्चाई।
सद्गुणों का विकास मानव जीवन की सबसे बड़ी संपत्ति है। श्रेष्ठ आचरण, आत्मबल और आत्मविकास से जीवन उज्ज्वल होता है। सुसंस्कृत बनने की प्रेरणा पढ़ें।
यह इमेज ‘ईश्वर न्याय करेंगे’ के आध्यात्मिक विचार को प्रस्तुत करती है, जो जीवन में अपमान, अन्याय और दुख जैसी परिस्थितियों में मन की शांति बनाए रखने की प्रेरणा देती है। चित्र का उद्देश्य लोगों को मानसिक दृढ़ता, धैर्य और सकारात्मक सोच के लिए प्रेरित करना है, जिससे व्यक्ति कठिन हालात में भी स्थिर और प्रसन्न रह सके।
वेदों और धर्मशास्त्रों में बताया गया है कि मनुष्य के हर कर्म के 14 साक्षी होते हैं — सूर्य, अग्नि, चंद्रमा, वायु, पृथ्वी, आकाश, जल, काल, दिन, रात्रि, संध्या, दिशाएं, इन्द्रियां और धर्म। जानिए कैसे ये साक्षी हर कर्म का हिसाब रखते हैं और मनुष्य के पाप-पुण्य का निर्धारण करते हैं।
जीवन में खुश रहने का असली रहस्य दुखों का बोझ छोड़ देना है। यह प्रेरक कहानी बताती है कि जब हम अपने दुखों और तनाव को त्याग देते हैं, तब जीवन में सच्ची खुशी और शांति का अनुभव होता है। पढ़िए “खुश रहने का रहस्य” — एक महात्मा और उनके शिष्य की प्रेरक कथा।
श्रीराम और भरत के संवाद में निहित जीवन संदेश — जहाँ दण्ड का अर्थ करुणा और क्षमा से पुनः परिभाषित हुआ। जानिए रामायण का यह अमर सत्य।
जानिए मनुष्य के कर्मों का फल क्या होता है। यह प्रेरक कथा बताती है कि दूसरों की बुराई करने से पाप का हिस्सा हमारे खाते में जुड़ जाता है।
फूलों से सजी राधा-कृष्ण की भव्य झांकी भक्तों को भक्ति, सौंदर्य और अलौकिक शांति का अनुभव कराती है।
मनुष्य अपने भाग्य का निर्माता है। उसकी सफलता या असफलता विचारों की दिशा पर निर्भर करती है। आइए जानें, क्यों विचार शक्ति को परिष्कृत करना जीवन की सबसे बड़ी आवश्यकता है।
श्री राधा-कृष्ण की यह मनोहारी प्रतिमा भक्ति और प्रेम का अद्भुत संगम दर्शाती है। पुष्पों और अलंकारों से सुसज्जित यह मंदिर दृश्य भक्तों को शांति और आनंद का अनुभव कराता है। इस दिव्य झांकी में भक्ति की मधुर धारा प्रवाहित होती है, जो हृदय को पवित्र और आत्मा को प्रसन्न करती है।
भक्ति हमारे जीवन को धैर्य और प्रसन्नता से भर देती है। श्री राधा-कृष्ण और संकटमोचन हनुमान जी के दिव्य श्रृंगार दर्शन के माध्यम से जानें कि किस प्रकार भक्ति हमें विषमताओं में भी धैर्यवान और आनंदमय जीवन जीने की शक्ति देती है।
राधा-कृष्ण की मनमोहक छवि और भगवान जगन्नाथ, बलभद्र, सुभद्रा की अलौकिक झांकी, श्रद्धा और भक्ति का जीवंत प्रतीक हैं। यह दृश्य न केवल सौंदर्य से परिपूर्ण है, बल्कि आस्था की ऊर्जा से भी भरपूर है।
दुःख के बाद सुख और संकट के बाद सुविधा आना प्रकृति का अटल नियम है। हमें बस इतना समझना है कि संकट आने पर क्या करें-क्या न करें पढ़े
देश-भक्ति, आदर्श-भक्ति, ईश्वर-भक्ति आदि के रूपों में त्याग-बलिदान के, तप-साधना के अनुकरणीय आदर्शवादिता के अनेकों उदाहरण | जरूर पढ़े
ईश्वर की न्याय व्यवस्था
सभ्यता और शिष्टाचार किसी भी व्यक्ति के व्यक्तित्व को निखारने वाले दो अनमोल रत्न हैं। इन दोनों का पारस्परिक संबंध इतना घनिष्ठ है कि एक […]
क्षमताओं और अच्छाइयों को छिपाकर रखने से न केवल व्यक्ति स्वयं नुकसान उठाता है, बल्कि समाज भी उससे वंचित रह जाता है
हर दिशा में हमारे और दूसरों के जीवन को बेहतर बनाता है। मानसिक वातावरण
ईश्वर की न्याय व्यवस्था के अनुसार वैसा ही फल
“समय” ही जीवन है। यह हमारी सबसे अनमोल संपत्ति है, जिसे भगवान ने हमें जीवन की पूंजी के रूप में प्रदान किया है। इसका उपयोग […]
एक विलक्षण जीवन तत्त्व
यह लेख विचारों की शक्ति, उनके प्रभाव और सकारात्मक दिशा में जीवन को ढालने के तरीकों को समाहित करता है। इसमें कहानी, सुझाव और प्रेरक तत्व जोड़े गए हैं ताकि यह प्रभावी और उपयोगी लगे।
एक शांत और आध्यात्मिक दृश्य, जिसमें वृद्ध व्यक्ति बच्चों को जीवन के चार रत्नों की शिक्षा दे रहा है।
त्रिजटा की कथा रामायण के गूढ़ और प्रेरणादायक पहलुओं में से एक है, जो एक राक्षसी से साध्वी बनने के सफर को दर्शाती है। यह कथा हमें न केवल कर्तव्य, विवेक और धर्म के महत्व का पाठ सिखाती है, बल्कि यह भी बताती है कि जीवन में सही निर्णयों और सही समय पर किए गए कार्यों से कैसे किसी का व्यक्तित्व और इतिहास में स्थान बदल सकता है।
दृष्टिकोण की विकृतियाँ हमें अकारण उलझनों में उलझाती हैं और खिन्न रहने के लिए विवश करती हैं। हम गरीब हैं या अमीर, इसका निर्णय दूसरों […]
छवि, जिसमें लक्ष्मण जी विनम्रतापूर्वक सैनिक से भिक्षा मांगते हुए दिखाए गए हैं। चित्र में प्रभु श्रीराम और हनुमान दूर से देखते हुए दिखाई दे रहे हैं, और दृश्य को भोर की रोशनी और प्राकृतिक परिवेश का दिव्य दर्शन।
जीवन में कुछ भी असंभव नहीं। पाने की जिज्ञासा जानने का हठ हर बाधा को पार करा देता है।
दुर्बल मन:स्थिति के लोग प्रायः अशुभ भविष्य की कल्पनाएँ करते रहते हैं। विपत्तियों और असफलताओं की आशंकाएँ उनके मन पर छाई रहती हैं। वे ऐसे […]
सद्विचारों की सतत बहने वाली गंगोत्री| भाव
हमारी शिक्षा और व्यवस्था, आलेख
१७ नवंबर २०२४, रविवार
– मार्गशीर्ष कृष्ण पक्ष द्वितीया, संवत २०८१
अपूर्णता: संसार में पूर्ण कुछ नहीं है। केवल ब्रह्म को ही पूर्ण कहा जाता है, जिसके विषय में शुक्ल यजुर्वेद के शांतिपाठ में वर्णित है: […]
१६ नवंबर २०२४ शनिवार”
मार्गशीर्ष कृष्णपक्ष प्रतिपदा २०८१
१५ नवंबर २०२४ शुक्रवार- ‼️
-कार्तिक शुक्लपक्ष पूर्णिमा २०८१
‼ -१४ नवंबर २०२४ गुरुवार- ‼️
-कार्तिक शुक्लपक्ष त्रयोदशी २०८१-
१३ नवंबर २०२४ बुधवार-
कार्तिक शुक्लपक्ष द्वादशी २०८१
१२ नवंबर २०२४ मंगलवार- ‼️
-कार्तिक शुक्लपक्ष एकादशी २०८१
११ नवंबर २०२४ सोमवार- ‼️
-कार्तिक शुक्लपक्ष दशमी २०८१
१० नवंबर २०२४ रविवार- ‼️
-कार्तिक शुक्लपक्ष नवमी २०८१
०९ नवंबर २०२४ शनिवार- ‼️
-कार्तिक शुक्लपक्ष अष्ट्मी २०८१
युधिष्ठिर ने उत्तर में कहा- “हे यक्ष! सूर्य को ब्रह्म उदित करता है। देवता उसके चारों ओर चलते हैं। धर्म उसे अस्त करता है और वह सत्य में प्रतिष्ठित है।”
‼ -०३ नवंबर २०२४ रविवार- ‼️
-कार्तिक शुक्लपक्ष द्वितीया २०८१-
३० अक्टूबर २०२४ बुधवार-‼️
-कार्तिक कृष्णपक्ष चतुर्दशी २०८१
१९ अक्टूबर २०२४ शनिवार-‼️
कार्तिक कृष्णपक्ष द्वितीया २०८१
१८ अक्टूबर २०२४ शुक्रवार-‼️
-कार्तिक कृष्णपक्ष प्रतिपदा २०८१-
११ अक्टूबर २०२४ शुक्रवार-‼️
-आश्विन शुक्लपक्ष नवमी २०८१
२६ सितंबर २०२४ गुरुवार-‼️
-आश्विन कृष्णपक्ष नवमी २०८१-
१९ सितंबर २०२४ गुरुवार-‼️
-आश्विन कृष्णपक्ष द्वितीया २०८१-
‼️संजीवनी ज्ञानामृत‼️
महाराज युधिष्ठिर का संकल्प था कि वे अपनी प्रजा को सदा दान देते रहेंगे। उनके पास अक्षय पात्र था जिस की विशेषता थी कि उससे […]
नारी आज का अति सोचनीय विषय है । आज के समय को देखते हुए नारी की अस्मिता तार तार हो रही है। जगह जगह नारी शोषण , अत्याचार , बलात्कार , घटनाएं देखने को मिल रही हैं। आखिर क्या हो गया है इस पंगु समाज की सोच को ।
जब भी मन जोश से पूर्ण होता है,वह ऊंची ऊंची पर्वत श्रृंखला को भी जीत लेता है,मन को सदैव ऊर्जावान बनाए रखने का संकल्प अच्छे विचारों से सहमती है । ” मन के हारे हार है मन के जीते जीत “।
वक्त एक ऐसा परिंदा है जो अपने पंखों में सब कुछ दबाकर ले जाता है । वक्त के सामने कोई भी नहीं टिक सका है । वह अनवरत है , निरंतर गतिमान है ।
१६ अगस्त २०२४ शुक्रवार- ‼️
-श्रावण शुक्लपक्ष एकादशी २०८१-
मन मनुष्य का वह द्वार है जिसमें प्रवेश करने के बाद हमारी सम्पूर्ण जीवन की मनो वृति ही परिवर्तित हो जाती है । कहा गया है, “मन हमारा मित्र भी है और शत्रु भी”।
काव्य की सरसता मन को कोमल भाव प्रदान करती है । “कलम एक ऐसा उपकरण है जो लिखी गई बात को सत्य प्रमाणित करती है” ।
मन को सूक्ष्म रूप शरीर कह सकते हैं। मन के समान चतुर , निडर , शासक भोक्ता अन्य कोई भी नहीं है
प्रकाश का उद्देश्य अनंत को प्रकाशित करना ।मृत को प्राणवान करना । इस कविता का भाव यह है कि ओ प्रकाश यद्यपि तु प्रकाशवान है और तेरा प्रण अज्ञान रूपी अंधेरे को नष्ट करना है,फिर भी मेरे लिए तु धीरे धीरे चल ताकि मैं भी तुम्हारे साथ चल सकूं ।
वृक्ष ही जीवन है अब यह सत्य बात लोगों के लिए मात्र निज स्वार्थ सिद्धि के लिए प्रयोग में लाई जा रही है। वृक्षों की व्यथा कौन सुने सब आडम्बर की अटारी पर चढ़ कर बैठे हुए हैं। विकास तो सबको सूझ रहा है परंतु आंतरिक दुःख से हर कोई अनभिज्ञ है ।
संकल्प यदि दृढ़ है तो बाधाएं भी संघर्ष की विरोधी बन जाती हैं।अनंत के प्रेम को लगन अनंत से मिला देती है।
अधर्म जब अपनी सीमा से ऊपर उठकर चलने लगता है तो परशु धारी परशुराम जैसे गुरुओं और सुदर्शन चक्र धारी भगवान श्री कृष्ण को प्रथ्वी पर आना ही पड़ता है। फिर विजय की ललकार से अधर्म क्षत विक्षत हो जाता है।
आज के समय का मनुष्य मोह,स्वार्थ मिथ्या अहंकार में डूबकर प्रति एक कार्य कर रहा है । उसके भाषण में स्वार्थ का मिथ्यावाद है ।
दुःख की परिस्थिति में अपनी हिम्मत कभी नहीं टूटनी चाहिए। हौंसला मनुष्य का सबसे बड़ा मित्र है ।
मनुष्य के विचारों में यदि प्राण हैं तो वे क्रांति को जन्म देते हैं, क्रांति परिवर्तन करती है। परिवर्तन लहू मांगता है । लहू जीवन के लिए आवश्यक है । आवश्यकताएं जीवन के लिए कटिबद्ध हैं । इसलिए परिवर्तन के लिए तैयार रहना चाहिए। परिवर्तन से ही सुधार संभव है ।
०६ अगस्त २०२४ मंगलवार- ‼️
-श्रावण शुक्लपक्ष द्वितीया २०८१-
बात की महिमा अनंत अपार है । बात ही कारण और बात ही निराकरण है ऐसी परिभाषा है बात की । बात करने से ही सब संशय और भ्रम नष्ट हो जाते हैं। अधिकतर लोग अपने आप को छिपाने के लिए बात करने से पीछे रहते हैं। बात एक प्रकार की अभिव्यक्ति है। जो आपको बेबाक बना सकती है।
कविता का भावार्थ यह है कि हम जिस भी परिस्थिति में हों स्वयं से प्रति साहस से पूर्ण उम्मीद को कभी नहीं छोड़ना चाहिए। स्वयं से यदि उम्मीद कभी न टूटे तो मनुष्य हर असफलता को पार कर जाता है।
०३ अगस्त २०२४ शनिवार- ‼️
-श्रावण कृष्णपक्ष चतुर्दशी २०८१-
आनंद की दौड़ भले ही धीमी हो पर वह एक ऐसी व्यवस्था है जो अंतर को उजाले से भर देती है।सुख की अग्नि जीवन को […]
जितना अहंकार को त्याग कर आप प्रकृति के समीप जाएंगे , वह उतना ही आपको स्नेह करेगी यह एक दम सत्य और प्रमाणिक बात है,जो […]
०१ अगस्त २०२४ गुरुवार- ‼
-श्रावण कृष्णपक्ष द्वादशी २०८१
“मूल उद्देश्य”
समता का मूल अर्थ है, समानता । समानता अपने अर्थ में एक दम सरल जान पड़ती है किंतु इसके गहन भाव को हम जीवन पर्यंत भी व्यवहार में क्रियान्वित नहीं कर पाते । समानता का अन्य भाव , पक्षपात रहित भावना । आशय यही है कि हम सभी को हर अवस्था , दशा में सम रहना चाहिए। यही योगी और योग की पराकाष्ठा है ।
-३१ जुलाई २०२४ बुधवार – ‼️
-श्रावण कृष्णपक्ष एकादशी २०८१
गौ माता एक परित्यक्ता “मां”। मानव की बढ़ती की स्वार्थ की भूख और क्रूरता एक मानसिक दिवालियापन। ✍️
अभिलाषा भारद्वाज
३० जुलाई २०२४ मंगलवार-‼️ -श्रावण कृष्णपक्ष दशमी २०८१- ‼️संजीवनी ज्ञानामृत‼️
२९ जुलाई २०२४ सोमवार- ‼️
-श्रावण कृष्णपक्ष नवमी २०८१
भगवान श्रीकृष्ण ने महाभारत युद्ध के 36 साल बाद अपना देह त्याग दिया। जब पांडवों ने उनका अंतिम संस्कार किया तो श्रीकृष्ण का पूरा शरीर तो अग्नि में समा गया, लेकिन उनका हृदय धड़क ही रहा था।
०९ जुलाई २०२४ मंगलवार- ‼️
-आषाढ़ शुक्लपक्ष चतुर्थी २०८१-
महायज्ञ के यज्ञमंडप की परिक्रमा हरिनाम संकीर्तन करते हुए करता है उसे अर्थ, धर्म काम और मोक्ष की मोक्ष की प्राप्ति होती है।
धारणाओं एवं विश्वासों को जाने-अनजाने ज्यों का त्यों अपना लेता है। वह उनके विषय में सत्य असत्य, तथ्य अथवा अतथ्य का तर्क लेकर न तो विचार करता है |
सोचना क्लिष्ट कल्पना है कि घर वालों को सहमत करने के बाद परमार्थ के लिए कदम उठाएँगे। यह पूरा जीवन समाप्त हो जाने पर भी संभव नहीं होगा।
हमारे आचरण और रहन-सहन में और भी ऐसी अनेक छोटी-बड़ी खराब आदतें शामिल हो गई हैं…
विवेकानंद के पास आये और उनसे नम्रतापूर्वक पूछा– आपने हम लोगों की बात सुनी। आपने बुरा माना होगा ?
स्वामीजी ने सहज शालीनता से कहा– “मेरा मस्तिष्क अपने ही कार्यों में इतना अधिक व्यस्त था कि आप लोगों की बात सुनी भी पर उन पर ध्यान देने और उनका बुरा मानने का अवसर ही नहीं मिला।” स्वामीजी की यह जवाब सुनकर अंग्रेजों का सिर शर्म से झुक गया और उन्होंने चरणों में झुककर उनकी शिष्यता स्वीकार कर ली।
“प्रार्थना” विश्वास की प्रतिध्वनि है । रथ के पहियों में जितना अधिक भार होता है, उतना ही गहरा निशान वे धरती में बना देते हैं । प्रार्थना की रेखाएं लक्ष्य तक दौड़ी जाती हैं, और मनोवांछित सफलता खींच लाती हैं । विश्वास जितना उत्कृष्ट होगा परिणाम भी उतने ही सत्वर और प्रभावशाली होंगे ।
आज के धनधारी, सत्ताधारी, वैज्ञानिक, राजनीतिज्ञ आदि अपना काम करते हुए नित्य कुछ समय प्रभु की प्रार्थना का भी कार्यक्रम अपना लें, तो आज के यह सारे विनाश साधन स्वतः निर्माण साधनों में बदल जाएँ । उनके जीवन का प्रवाह अनायास ही स्वार्थ की ओर से परमार्थ की ओर बह चलेगा और तब वे स्वयं ही ध्वंसक उपादानों से घृणा करने लगेंगे और अपनी क्षमताओं को विश्व कल्याण की दिशा में मोड़ देंगे ।
३ अप्रैल २०२४ बुधवार-
चैत्र कृष्णपक्ष नवमी २०८०
व्यवहार की मधुरता, सरलता और निष्कपटता में वह शक्ति होती है जो दूसरों के बंद द्वार खोल देती है। प्रारंभिक मिलन के मधुर व्यवहार से […]
शिव-पार्वती की अद्भुत […]
क्या लिखूं…..?ऐसा जो हर किसी के लिए एक रौशनी बन जाए आंसू की एक एक बूँद सबके लिए दीप बनकर जगमगाए …चाह्तों के जहाजों पर अक्सर […]
मानस संजीवनी ज्ञानपीठ (सनातन वैदिक शिक्षा एवं शोध संस्थान) परिवार के प्रति हमें सच्चे अर्थों में कर्त्तव्यपरायण और उत्तरदायित्व निर्वाह करने वाला होना चाहिए। आज […]
मां तुझको अर्पण मेरे जीवन की फुलवारी है तुच्छ समर्पण मेरा तुझको मां तु कितनी प्यारी है मस्तक पर कर्तव्य का भार लिए हाथों में […]
मैंने सुना है वो रात के किनारों पर सुनसान अकेली राहों पर मेरे क़दमों में देखि है मैंने वो फड़कती कोंधतीबिजली सी […]
नैतिकता केवल किताबों में ही अच्छी लगती है, नैतिकता का पालन सत्ता में यदि हो तो राष्ट्र निर्माण होता है। योगिराज भगवान् श्री कृषण […]
संचित कर्मों का ऐसा ही पहाड़ बना हुआ है जिसमें शुभ अशुभ दोनो ही कर्म हैं जय सदगुरुदेव ईश् हमारे कर्म कितने गहरे हैं यह […]
कभी मौका दो खुद को कदम कदम मुस्कुराने का फूल तो हर हाल में मुस्कुराया करते हैं कभी तरीका दो खुद को वक्त के साथ […]
मेरे 19 ऊंटों में से आधे मेरे बेटे को,19 ऊंटों में से एक चौथाई मेरी बेटी को, और 19 ऊंटों में से पांचवाँ हिस्सा मेरे […]
क्योँ तुम आज भी जीवंत ही खड़े हो ….?क्या पीड़ा से तुम डरे नहीं …..?क्या पुन्य के प्रभाव गीत तुम लिखते हो …?जो डटे […]
आज हर तरफ भुखमरी देखि है मैंने आँखों में पानी दर्द में सनी लाचारी देखी है मैंने बेजुबानों की बात तो छोड़ ही डालो जुबान भी रोटी […]
मुसाफिर हूँ अपना सफर है अपनी ही कहानी लिखता हूँ …… जो छिपी है ,तुझमें असीम गहराइयाँ उसमें डूब खो जाना चाहता हूँ मुसाफिर हूँ […]
प्रिय वृक्ष प्रिय वृक्ष तुम्हारी लता रुपी झरोखों से नित ही मैं सूरज की नृत्य करती रश्मियों को देखकर आह्लादित होता हूँ ये नृत्य करती रश्मियाँ […]
अभी उड़ना बाकी है उड़ना अभी बाकी है क्यूंकि आशाओं की शान अभी बाकी है थम चुकी भावनाओं का मान अभी बाकी है सपनों की राह में […]
“अगर तुम समझती मेरी भाषा तो जीवन है हर पल एक प्यारी सी आशा … अभिव्यक्ति के मौन […]
विलुप्त हो रहा निश्चय तेरा,तु निज धर्मं भुला कर बैठा विलुप्त हो रहा निश्चय तेरा तु निज धर्म भुला कर बैठा, निज […]
मैं बाग़ की नन्हीं कलियों में ” मैं बाग़ की नन्ही कलियों में सवेरा निशदिन ढूंढ कर लाई | सूरज की चंचल नव किरणों संग […]
आज भारत ही नहीं सारे संसार की बड़ी भयावह स्थिति हो गई है । संसार एक ऐसे बिंदु के समीप पहुँच गया है, जहाँ पर […]
मिट्टी एक जीवन स्वरुप मिट्टी की तरह बनकर देखो हर सांचे में ढलकर देखो पलती है कर्मठ धरणी पर करने समर्पण जीवन को दाहकता में […]
हार एक पुरुष्कार जीतना अहम नहीं है जीत के पश्चात यदि अहम है तो जीत निश्चित ही नहीं है जीत उतनी आनंद दायक नहीं जितनी […]
मनुष्य के पास ईश्वर प्रदत्त पूँजी है – “समय” “समय” संसार की सबसे मूल्यवान संपदा है। यह […]
ईश्वर में स्थिर रहते हुए अपने सभी कर्तव्यों को पूर्ण करना ही वास्तविक कर्म योग है। बालक […]
DntvIndiaNews.com की और से सभी देश वासियों को हार्दिक शुभकामनाएँ | बसंत पंचमी हे ! ऋतुराज प्रेमराज बसंत आपको वंदन हे ! प्रकृति नंदन स्वीकार […]
प्रेरक प्रसंग {संपत्ति बड़ी या संस्कार} दक्षिण भारत में एक महान सन्त हुए तिरुवल्लुवर। वे अपने प्रवचनों से लोगों की समस्याओं का समाधान […]
आओ चलो नदी की सैर पर चलते हैं पानी में हम भी अपनी तस्वीर देखते हैं आसमा तो हमारा है ही जल धरती पर सूरज […]
प्रसन्नता प्राप्ति का अद्भुत रहस्य| “प्रसन्नता” प्राप्ति का मुख्य रहस्य यह है कि जितने परिमाण में समाज की अंतरात्मा को हमारे कार्य प्रसन्न करेंगे उतनी […]
विलुप्ति का समा बांधे ये मेरा मन है क्यूं भाजे मेरे मन की मेरे तन की मचलती आस तुम ही हो,,, मैं जब भी छोड़ […]
एक किसान था, वह एक बड़े से खेत में खेती किया करता था। उस खेत के बीचों-बीच पत्थर का एक हिस्सा ज़मीन से ऊपर निकला […]
एक माता आटा गूंध रही थीं। इतने में उसका चार साल का बच्चा जाग गया और रोना शुरु कर दिया। मां दौड़कर उसके पास आई […]
पहली बात, वह यह, हमारे भीतर जो यह आकांक्षा और दौड़ होती है कि हम भर लें अपने को, फुलफिलमेंट की, पूर्णता की, पा लेने […]
गया/बिहार। एक वृद्ध महिला बस में यात्रा कर रही थी। एक बसस्टॉप पर बस रुकी व एक बड़बड़ाती हुई क्रोधी युवती बस में चढ़ी। वह […]
उत्तर- इन पाँच भौतिक शरीर में हृदय में स्थित सुषम्ना नाड़ी में आत्मा का निवास है, जिसकी चेतना को, जिसे सुरति कहते हैं, मन ग्रहण […]
“सत्य” भाषण वाणी का तप है, इससे “वाक सिद्धि” जैसी विभूतियाँ प्राप्त होती है, इसलिए सत्य भाषण का हर किसी को अभ्यास करना चाहिए उसके […]
एक समय की बात है। एक नगर में एक कंजूस राजेश नामक व्यक्ति रहता था। उसकी कंजूसी सर्वप्रसिद्ध थी। वह खाने, पहनने तक में भी […]
मीराबाई चानू*, भारतीय ओलम्पिक वैटलिफ्ट विजेता की कहानी है यह। इस सत्य घटना को पढ़ने के बाद शब्द ही नहीं बचे हैं मेरे पास कुछ […]
ऐ मित्रों! कबीर साहेब जी बीजक में कहे है कि यह दुःखमय संसार है। संसार की सारी सम्पदा क्षणिक अनित्य है, यानी सदैव साथ रहने […]
20 मई को जीकेसी के सौजन्य से प्रार्थना एवं सत्संग का आयोजन पटना, 19 मई ग्लोबल कायस्थ कॉन्फ्रेंस (जीकेसी) कला संस्कृति प्रकोष्ठ के सौजन्य से […]
स्वर्ण वृक्ष शमी शमी में अग्नि का वास होने से वैदिक काल से ही यज्ञ के लिए अरणी […]
यह कहानी संत के ज्ञान को दर्शाने वाली कथा है क्युकि हमेशा ही ये माना जाता है की संत, गुरु, साधू और मुनि महाराज के […]
(पुण्य कर्म वह श्रेष्ठ होता है जिसमे ” अहंकार ” ना हो , ऐसा पुण्य प्रभु को समर्पित होता है और प्रारब्ध ( भाग्य ) […]
संतों की एक सभा चल रही थी। सभा को देख किसी ने एक घड़े में गंगाजल भरकर वहां रखवा दिया ताकि संत जन, जब प्यास […]
एक सेठ था। वह बर्तनों को किराये पर देता था और उनसे कमाई करता था। एक बार किसी को किराये पर बर्तन दिये। वह इन्सान […]
