ज्ञान की बात

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मंगलवार को तिल खाना चाहिए या नहीं? भगवान हनुमान की छवि के साथ तिल और तिल तेल का प्रतीकात्मक चित्र – धार्मिक मान्यता और सच्चाई पर आधारित DNTV न्यूज़ थंबनेल।

क्या मंगलवार को तिल खाना चाहिए? जानिए धार्मिक मान्यता और सच्चाई

मंगलवार को तिल खाना शुभ है या अशुभ? जानिए हनुमान जी से जुड़ी धार्मिक मान्यता और स्वास्थ्य के नजरिए से पूरी सच्चाई।

सद्गुण बढ़ाने और सुसंस्कृत जीवन अपनाने पर आधारित प्रेरणात्मक संदेश—चरित्र निर्माण और आत्मविकास का प्रतीक चित्र।

सद्गुण बढ़ाएं, सुसंस्कृत बनें” — चरित्र निर्माण ही मानव जीवन की सर्वोच्च साधना

सद्गुणों का विकास मानव जीवन की सबसे बड़ी संपत्ति है। श्रेष्ठ आचरण, आत्मबल और आत्मविकास से जीवन उज्ज्वल होता है। सुसंस्कृत बनने की प्रेरणा पढ़ें।

ईश्वर न्याय करेंगे संदेश – जीवन में अन्याय, दुख और अपमान से उबरने का आध्यात्मिक मार्ग

ईश्वर न्याय करेंगे — मन को शांत रखने का एक सरल मार्ग

यह इमेज ‘ईश्वर न्याय करेंगे’ के आध्यात्मिक विचार को प्रस्तुत करती है, जो जीवन में अपमान, अन्याय और दुख जैसी परिस्थितियों में मन की शांति बनाए रखने की प्रेरणा देती है। चित्र का उद्देश्य लोगों को मानसिक दृढ़ता, धैर्य और सकारात्मक सोच के लिए प्रेरित करना है, जिससे व्यक्ति कठिन हालात में भी स्थिर और प्रसन्न रह सके।

ध्यानमग्न मनुष्य के चारों ओर सूर्य, अग्नि, चंद्रमा, जल, वायु और अन्य 14 साक्षियों के प्रतीक — कर्मों के साक्षी दर्शाते हुए।

कौन हैं मनुष्य के कर्मों के साक्षी? जानिए धर्मग्रंथों की दृष्टि से सत्य

वेदों और धर्मशास्त्रों में बताया गया है कि मनुष्य के हर कर्म के 14 साक्षी होते हैं — सूर्य, अग्नि, चंद्रमा, वायु, पृथ्वी, आकाश, जल, काल, दिन, रात्रि, संध्या, दिशाएं, इन्द्रियां और धर्म। जानिए कैसे ये साक्षी हर कर्म का हिसाब रखते हैं और मनुष्य के पाप-पुण्य का निर्धारण करते हैं।

महात्मा और व्यक्ति की प्रेरक चित्रण — खुश रहने का रहस्य: दुखों का बोझ छोड़िए, मुस्कुराइए।

खुश रहने का रहस्य : दुखों का बोझ छोड़िए, मुस्कुराइए

जीवन में खुश रहने का असली रहस्य दुखों का बोझ छोड़ देना है। यह प्रेरक कहानी बताती है कि जब हम अपने दुखों और तनाव को त्याग देते हैं, तब जीवन में सच्ची खुशी और शांति का अनुभव होता है। पढ़िए “खुश रहने का रहस्य” — एक महात्मा और उनके शिष्य की प्रेरक कथा।

सरयू तट पर श्रीराम और भरत के बीच संवाद — करुणा, धर्म और क्षमा की गहराई को दर्शाता दृश्य।

राम : दण्ड से ऊपर करुणा का धर्म

श्रीराम और भरत के संवाद में निहित जीवन संदेश — जहाँ दण्ड का अर्थ करुणा और क्षमा से पुनः परिभाषित हुआ। जानिए रामायण का यह अमर सत्य।

श्री राधा-कृष्ण की मनमोहक झांकी, पुष्पों से सुसज्जित, कर्मों के फल पर प्रेरक संदेश के साथ।

मनुष्य के कर्मों का फल: एक प्रेरक प्रसंग

जानिए मनुष्य के कर्मों का फल क्या होता है। यह प्रेरक कथा बताती है कि दूसरों की बुराई करने से पाप का हिस्सा हमारे खाते में जुड़ जाता है।

राधा-कृष्ण की झांकी, फूलों से सजी सुंदर मंदिर सजावट

लक्ष्य पर ध्यान

फूलों से सजी राधा-कृष्ण की भव्य झांकी भक्तों को भक्ति, सौंदर्य और अलौकिक शांति का अनुभव कराती है।

विचार शक्ति को परिष्कृत कीजिए

मनुष्य अपने भाग्य का निर्माता है। उसकी सफलता या असफलता विचारों की दिशा पर निर्भर करती है। आइए जानें, क्यों विचार शक्ति को परिष्कृत करना जीवन की सबसे बड़ी आवश्यकता है।

श्री राधा-कृष्ण की अलौकिक प्रतिमा, पुष्पों से सुसज्जित मंदिर दृश्य

अलग-अलग संस्कार और जीवन की सच्चाई

श्री राधा-कृष्ण की यह मनोहारी प्रतिमा भक्ति और प्रेम का अद्भुत संगम दर्शाती है। पुष्पों और अलंकारों से सुसज्जित यह मंदिर दृश्य भक्तों को शांति और आनंद का अनुभव कराता है। इस दिव्य झांकी में भक्ति की मधुर धारा प्रवाहित होती है, जो हृदय को पवित्र और आत्मा को प्रसन्न करती है।

श्री राधा-कृष्ण एवं संकटमोचन हनुमान जी की भव्य झांकी, पुष्पों और श्रृंगार से सुसज्जित

भक्ति का प्रसाद

भक्ति हमारे जीवन को धैर्य और प्रसन्नता से भर देती है। श्री राधा-कृष्ण और संकटमोचन हनुमान जी के दिव्य श्रृंगार दर्शन के माध्यम से जानें कि किस प्रकार भक्ति हमें विषमताओं में भी धैर्यवान और आनंदमय जीवन जीने की शक्ति देती है।

राधा-कृष्ण और जगन्नाथ, बलभद्र, सुभद्रा जी की अलंकृत मूर्तियाँ सजीव रूप में सुसज्जित

श्रद्धा, भक्ति, विश्वास और संकल्प: मानव जीवन की आध्यात्मिक उड़ान के स्तम्भ

राधा-कृष्ण की मनमोहक छवि और भगवान जगन्नाथ, बलभद्र, सुभद्रा की अलौकिक झांकी, श्रद्धा और भक्ति का जीवंत प्रतीक हैं। यह दृश्य न केवल सौंदर्य से परिपूर्ण है, बल्कि आस्था की ऊर्जा से भी भरपूर है।

Crisis and sorrow

संकट और दुःख: सुख-समृद्धि के अग्रदूत

दुःख के बाद सुख और संकट के बाद सुविधा आना प्रकृति का अटल नियम है। हमें बस इतना समझना है कि संकट आने पर क्या करें-क्या न करें पढ़े

Gyan Ki Baat

श्रद्धा-भक्ति-विश्वास-संकल्प

देश-भक्ति, आदर्श-भक्ति, ईश्वर-भक्ति आदि के रूपों में त्याग-बलिदान के, तप-साधना के अनुकरणीय आदर्शवादिता के अनेकों उदाहरण | जरूर पढ़े

Habits of uncivilization and their effects

सभ्यता” और “शिष्टाचार” – व्यक्तित्व के आधारस्तंभ

सभ्यता और शिष्टाचार किसी भी व्यक्ति के व्यक्तित्व को निखारने वाले दो अनमोल रत्न हैं। इन दोनों का पारस्परिक संबंध इतना घनिष्ठ है कि एक […]

विचारों की शक्ति: आपकी सफलता का आधार

यह लेख विचारों की शक्ति, उनके प्रभाव और सकारात्मक दिशा में जीवन को ढालने के तरीकों को समाहित करता है। इसमें कहानी, सुझाव और प्रेरक तत्व जोड़े गए हैं ताकि यह प्रभावी और उपयोगी लगे।

Children

चार अनमोल रत्न: जीवन के सार को समझने की एक प्रेरणादायक कथा

एक शांत और आध्यात्मिक दृश्य, जिसमें वृद्ध व्यक्ति बच्चों को जीवन के चार रत्नों की शिक्षा दे रहा है।

त्रिजटा: करुणा और धर्म की प्रतीक

त्रिजटा की कथा रामायण के गूढ़ और प्रेरणादायक पहलुओं में से एक है, जो एक राक्षसी से साध्वी बनने के सफर को दर्शाती है। यह कथा हमें न केवल कर्तव्य, विवेक और धर्म के महत्व का पाठ सिखाती है, बल्कि यह भी बताती है कि जीवन में सही निर्णयों और सही समय पर किए गए कार्यों से कैसे किसी का व्यक्तित्व और इतिहास में स्थान बदल सकता है।

विनम्रता की शक्ति: लक्ष्मण और मेघनाद के युद्ध की अनकही सीख|

छवि, जिसमें लक्ष्मण जी विनम्रतापूर्वक सैनिक से भिक्षा मांगते हुए दिखाए गए हैं। चित्र में प्रभु श्रीराम और हनुमान दूर से देखते हुए दिखाई दे रहे हैं, और दृश्य को भोर की रोशनी और प्राकृतिक परिवेश का दिव्य दर्शन।

दुर्बल मन”शुभ संकल्प जगाइए|

दुर्बल मन:स्थिति के लोग प्रायः अशुभ भविष्य की कल्पनाएँ करते रहते हैं। विपत्तियों और असफलताओं की आशंकाएँ उनके मन पर छाई रहती हैं। वे ऐसे […]

“पूर्ण सत्य” किस बिंदु से किस बिंदु तक|

अपूर्णता: संसार में पूर्ण कुछ नहीं है। केवल ब्रह्म को ही पूर्ण कहा जाता है, जिसके विषय में शुक्ल यजुर्वेद के शांतिपाठ में वर्णित है: […]

यक्ष और युधिष्ठिर संवाद, आपका जीवन बदल देगा। एक बार अवश्य पढ़े

युधिष्ठिर ने उत्तर में कहा- “हे यक्ष! सूर्य को ब्रह्म उदित करता है। देवता उसके चारों ओर चलते हैं। धर्म उसे अस्त करता है और वह सत्य में प्रतिष्ठित है।”

नारी विशेष

नारी आज का अति सोचनीय विषय है । आज के समय को देखते हुए नारी की अस्मिता तार तार हो रही है। जगह जगह नारी शोषण , अत्याचार , बलात्कार , घटनाएं देखने को मिल रही हैं। आखिर क्या हो गया है इस पंगु समाज की सोच को ।

उठा लो मन को पर्वत सा

जब भी मन जोश से पूर्ण होता है,वह ऊंची ऊंची पर्वत श्रृंखला को भी जीत लेता है,मन को सदैव ऊर्जावान बनाए रखने का संकल्प अच्छे विचारों से सहमती है । ” मन के हारे हार है मन के जीते जीत “।

अंतर्मन का चित्रण

मन मनुष्य का वह द्वार है जिसमें प्रवेश करने के बाद हमारी सम्पूर्ण जीवन की मनो वृति ही परिवर्तित हो जाती है । कहा गया है, “मन हमारा मित्र भी है और शत्रु भी”।

ओ रोशनी

प्रकाश का उद्देश्य अनंत को प्रकाशित करना ।मृत को प्राणवान करना । इस कविता का भाव यह है कि ओ प्रकाश यद्यपि तु प्रकाशवान है और तेरा प्रण अज्ञान रूपी अंधेरे को नष्ट करना है,फिर भी मेरे लिए तु धीरे धीरे चल ताकि मैं भी तुम्हारे साथ चल सकूं ।

मैं वृक्ष हूं

वृक्ष ही जीवन है अब यह सत्य बात लोगों के लिए मात्र निज स्वार्थ सिद्धि के लिए प्रयोग में लाई जा रही है। वृक्षों की व्यथा कौन सुने सब आडम्बर की अटारी पर चढ़ कर बैठे हुए हैं। विकास तो सबको सूझ रहा है परंतु आंतरिक दुःख से हर कोई अनभिज्ञ है ।

जीत की ललकार

अधर्म जब अपनी सीमा से ऊपर उठकर चलने लगता है तो परशु धारी परशुराम जैसे गुरुओं और सुदर्शन चक्र धारी भगवान श्री कृष्ण को प्रथ्वी पर आना ही पड़ता है। फिर विजय की ललकार से अधर्म क्षत विक्षत हो जाता है।

परिवर्तन ही सुधार

मनुष्य के विचारों में यदि प्राण हैं तो वे क्रांति को जन्म देते हैं, क्रांति परिवर्तन करती है। परिवर्तन लहू मांगता है । लहू जीवन के लिए आवश्यक है । आवश्यकताएं जीवन के लिए कटिबद्ध हैं । इसलिए परिवर्तन के लिए तैयार रहना चाहिए। परिवर्तन से ही सुधार संभव है ।

बात की महिमा

बात की महिमा अनंत अपार है । बात ही कारण और बात ही निराकरण है ऐसी परिभाषा है बात की । बात करने से ही सब संशय और भ्रम नष्ट हो जाते हैं। अधिकतर लोग अपने आप को छिपाने के लिए बात करने से पीछे रहते हैं। बात एक प्रकार की अभिव्यक्ति है। जो आपको बेबाक बना सकती है।

उम्मीद

कविता का भावार्थ यह है कि हम जिस भी परिस्थिति में हों स्वयं से प्रति साहस से पूर्ण उम्मीद को कभी नहीं छोड़ना चाहिए। स्वयं से यदि उम्मीद कभी न टूटे तो मनुष्य हर असफलता को पार कर जाता है।

आज की प्रेरणा (समता)

“मूल उद्देश्य”
समता का मूल अर्थ है, समानता । समानता अपने अर्थ में एक दम सरल जान पड़ती है किंतु इसके गहन भाव को हम जीवन पर्यंत भी व्यवहार में क्रियान्वित नहीं कर पाते । समानता का अन्य भाव , पक्षपात रहित भावना । आशय यही है कि हम सभी को हर अवस्था , दशा में सम रहना चाहिए। यही योगी और योग की पराकाष्ठा है ।

समुद्र मंथन से १४ रत्नों में विशेष और महत्वपूर्ण श्री कामधेनु…

गौ माता एक परित्यक्ता “मां”। मानव की बढ़ती की स्वार्थ की भूख और क्रूरता एक मानसिक दिवालियापन। ✍️
अभिलाषा भारद्वाज

भगवान के इस हृदय अंश को ब्रह्म पदार्थ कहते हैं

जगन्नाथ महाप्रभु का रहस्य |

भगवान श्रीकृष्ण ने महाभारत युद्ध के 36 साल बाद अपना देह त्याग दिया। जब पांडवों ने उनका अंतिम संस्कार किया तो श्रीकृष्ण का पूरा शरीर तो अग्नि में समा गया, लेकिन उनका हृदय धड़क ही रहा था।

यज्ञ के माध्यम से स्वयं नारायण जीव को त्रिताप जैसे दैहिक दैविक और भौतिक तापों से मुक्त कर देते हैं। जिस स्थल पर महायज्ञ होता है, वह तीर्थ स्थल से बढ़कर है।जो महायज्ञ के यज्ञमंडप की परिक्रमा हरिनाम संकीर्तन करते हुए करता है उसे अर्थ, धर्म काम और मोक्ष की मोक्ष की प्राप्ति होती है।

यज्ञ स्थल तीर्थ से बढ़कर है|देवराहाशिवनाथ

महायज्ञ के यज्ञमंडप की परिक्रमा हरिनाम संकीर्तन करते हुए करता है उसे अर्थ, धर्म काम और मोक्ष की मोक्ष की प्राप्ति होती है।

DNTV INDIA NEWS

बौद्धिक दास न बनिए |

धारणाओं एवं विश्वासों को जाने-अनजाने ज्यों का त्यों अपना लेता है। वह उनके विषय में सत्य असत्य, तथ्य अथवा अतथ्य का तर्क लेकर न तो विचार करता है |

संजीवनी ज्ञानामृत

मोहग्रस्त नहीं, विवेकवान बनें |

सोचना क्लिष्ट कल्पना है कि घर वालों को सहमत करने के बाद परमार्थ के लिए कदम उठाएँगे। यह पूरा जीवन समाप्त हो जाने पर भी संभव नहीं होगा।

radhe radhe

‼️ लक्ष्य ‼️ ज्येष्ठ कृष्णपक्ष द्वितीया २०८१

विवेकानंद के पास आये और उनसे नम्रतापूर्वक पूछा– आपने हम लोगों की बात सुनी। आपने बुरा माना होगा ?
स्वामीजी ने सहज शालीनता से कहा– “मेरा मस्तिष्क अपने ही कार्यों में इतना अधिक व्यस्त था कि आप लोगों की बात सुनी भी पर उन पर ध्यान देने और उनका बुरा मानने का अवसर ही नहीं मिला।” स्वामीजी की यह जवाब सुनकर अंग्रेजों का सिर शर्म से झुक गया और उन्होंने चरणों में झुककर उनकी शिष्यता स्वीकार कर ली।

प्रार्थना में अतुलनीय बल है | २२ मई वैशाख शुक्लपक्ष चतुर्दशी २०८१

“प्रार्थना” विश्वास की प्रतिध्वनि है । रथ के पहियों में जितना अधिक भार होता है, उतना ही गहरा निशान वे धरती में बना देते हैं । प्रार्थना की रेखाएं लक्ष्य तक दौड़ी जाती हैं, और मनोवांछित सफलता खींच लाती हैं । विश्वास जितना उत्कृष्ट होगा परिणाम भी उतने ही सत्वर और प्रभावशाली होंगे ।

दैनिक जीवन का अनिवार्य क्रम बने / वैशाख शुक्लपक्ष नवमी २०८१

आज के धनधारी, सत्ताधारी, वैज्ञानिक, राजनीतिज्ञ आदि अपना काम करते हुए नित्य कुछ समय प्रभु की प्रार्थना का भी कार्यक्रम अपना लें, तो आज के यह सारे विनाश साधन स्वतः निर्माण साधनों में बदल जाएँ । उनके जीवन का प्रवाह अनायास ही स्वार्थ की ओर से परमार्थ की ओर बह चलेगा और तब वे स्वयं ही ध्वंसक उपादानों से घृणा करने लगेंगे और अपनी क्षमताओं को विश्व कल्याण की दिशा में मोड़ देंगे ।

हम सद्गुणी बनें / व्यवहार की मधुरता, सरलता और निष्कपटता में वह शक्ति / फाल्गुन कृष्णपक्ष अमावस्या 2080

व्यवहार की मधुरता, सरलता और निष्कपटता में वह शक्ति होती है जो दूसरों के बंद द्वार खोल देती है। प्रारंभिक मिलन के मधुर व्यवहार से […]

चाह्तों के जहाजों पर अक्सर आशाएं रोज सफर करती हैं KAVITA

 क्या लिखूं…..?ऐसा जो हर किसी के लिए एक रौशनी बन जाए आंसू की एक एक बूँद सबके लिए दीप बनकर  जगमगाए …चाह्तों के जहाजों पर अक्सर […]

मोहग्रस्त नहीं, विवेकवान बनें / फाल्गुन कृष्णपक्ष द्वादशी-2080

मानस संजीवनी ज्ञानपीठ (सनातन वैदिक शिक्षा एवं शोध संस्थान) परिवार के प्रति हमें सच्चे अर्थों में कर्त्तव्यपरायण और उत्तरदायित्व निर्वाह करने वाला होना चाहिए। आज […]

मां तुझको अर्पण मेरे जीवन की फुलवारी है| TODAY,S POEM

 मां तुझको अर्पण मेरे जीवन की फुलवारी है  तुच्छ समर्पण मेरा तुझको मां तु कितनी प्यारी है मस्तक पर कर्तव्य का भार लिए  हाथों में […]

हम कहाँ खड़े हैं ..? समाज और राष्ट्र के लिए हमारा कर्तव्य क्या है ..?

    नैतिकता केवल किताबों में ही अच्छी लगती है, नैतिकता का पालन सत्ता में यदि हो तो राष्ट्र निर्माण होता है। योगिराज भगवान् श्री कृषण […]

हमे सेवा की कद्र करनी चाहिए जब भी सेवा मिले|

 संचित कर्मों का ऐसा ही पहाड़ बना हुआ है जिसमें शुभ अशुभ दोनो ही कर्म हैं  जय सदगुरुदेव ईश्  हमारे कर्म कितने गहरे हैं यह […]

जब तक विकार रुपी १९ ऊँटो को दूर नहीं किया जाए ,तब तक सच्चा सुख शांति ,संतोष व् आनंद की प्राप्ति नहीं की जा सकती | {story}

मेरे 19 ऊंटों में से आधे मेरे बेटे को,19 ऊंटों में से एक चौथाई मेरी बेटी को, और 19 ऊंटों में से पांचवाँ हिस्सा मेरे […]

मुसाफिर हूँ {आज की कविता } Abhilasha Bhardwaaj

मुसाफिर हूँ  अपना सफर है  अपनी ही कहानी लिखता हूँ …… जो छिपी है ,तुझमें असीम गहराइयाँ  उसमें डूब खो जाना चाहता हूँ  मुसाफिर हूँ […]

प्रिय वृक्ष {आज की कविता } ABHILASHA BHARDWAJ

  प्रिय वृक्ष  प्रिय वृक्ष तुम्हारी लता रुपी झरोखों से नित ही मैं सूरज की नृत्य करती रश्मियों को देखकर आह्लादित होता हूँ  ये  नृत्य करती रश्मियाँ […]

विलुप्त हो रहा निश्चय तेरा,तु निज धर्मं भुला कर बैठा ,{आज की कविता } Gyan ki Baat

      विलुप्त हो रहा निश्चय तेरा,तु निज धर्मं भुला कर बैठा  विलुप्त हो रहा  निश्चय तेरा तु निज धर्म भुला कर बैठा,  निज […]

अपनी प्रार्थनाओं में लोगों को सद्बुद्धि मिलने का भी भाव रहना चाहिए Gyan Ganga

आज भारत ही नहीं सारे संसार की बड़ी भयावह स्थिति हो गई है । संसार एक ऐसे बिंदु के समीप पहुँच गया है, जहाँ पर […]

मिट्टी की तरह बनकर देखो {लघु कविता}Abhilasha Bhardwaaj

मिट्टी एक जीवन स्वरुप   मिट्टी की तरह बनकर देखो  हर सांचे में ढलकर देखो  पलती है कर्मठ धरणी पर करने समर्पण जीवन को दाहकता में […]

जीत अहम् नहीं है {लघु कविता } GYAN KI BAAT अभिलाषा भारद्वाज

हार एक पुरुष्कार  जीतना अहम नहीं है जीत के पश्चात यदि अहम है तो जीत निश्चित ही नहीं है  जीत उतनी आनंद दायक नहीं जितनी […]

हे ऋतुराज बसंत :अभिलाषा भरद्वाज DntvIndiaNews.com की और से सभी भारतवासियों को बसंत पंचमी की हार्दिक शुभकामनाएं |

DntvIndiaNews.com की और से सभी देश वासियों को हार्दिक शुभकामनाएँ | बसंत पंचमी हे  ! ऋतुराज प्रेमराज बसंत आपको वंदन हे ! प्रकृति नंदन स्वीकार […]

♨️प्रेरक प्रसंग♨️ज्ञान गंगा DntvIndiaNews.com

   प्रेरक प्रसंग {संपत्ति बड़ी या संस्कार}     दक्षिण भारत में एक महान सन्त हुए तिरुवल्लुवर। वे अपने प्रवचनों से लोगों की समस्याओं का समाधान […]

“वास्तविक प्रसन्नता” का मूल रहस्य | Gyan Ki Baat

 प्रसन्नता प्राप्ति का अद्भुत रहस्य| “प्रसन्नता” प्राप्ति का मुख्य रहस्य यह है कि जितने परिमाण में समाज की अंतरात्मा को हमारे कार्य प्रसन्न करेंगे उतनी […]

यात्रा बहुत छोटी है। Story कमलेश दत्त मिश्र

गया/बिहार। एक वृद्ध महिला बस में यात्रा कर रही थी। एक बसस्टॉप पर बस रुकी व एक बड़बड़ाती हुई क्रोधी युवती बस में चढ़ी। वह […]

सत्य को सम्मान के साथ अपनाइए

“सत्य” भाषण वाणी का तप है, इससे “वाक सिद्धि” जैसी विभूतियाँ प्राप्त होती है, इसलिए सत्य भाषण का हर किसी को अभ्यास करना चाहिए उसके […]

Covid-19) जब अमेरिकी राष्ट्रपति ने खाया एक गरीब भारतीय लड़की का झूठा चावल*

मीराबाई चानू*, भारतीय ओलम्पिक वैटलिफ्ट विजेता की कहानी है यह। इस सत्य घटना को पढ़ने के बाद  शब्द ही नहीं बचे हैं मेरे पास कुछ […]

Covid-19 ) निरंजन कौन है? वह निरंजन किन-किन रूपों में और कहाँ-कहाँ वास किया हुआ है उस निरंजन से छूटने का उपाय क्या है?

ऐ मित्रों! कबीर साहेब जी बीजक में  कहे है कि यह दुःखमय संसार है। संसार की सारी सम्पदा क्षणिक अनित्य है, यानी सदैव साथ रहने […]

Covid-19 ) सत्संग और अध्यात्म सनातन संस्कृति का अभिन्न अंग / सत्संग जीवन में लाती है सकारात्मक ऊर्जा। राजीव रंजन प्रसाद

20 मई को जीकेसी के सौजन्य से प्रार्थना एवं सत्संग का आयोजन पटना, 19 मई ग्लोबल कायस्थ कॉन्फ्रेंस (जीकेसी) कला संस्कृति प्रकोष्ठ के सौजन्य से […]

संतो की सभा मिट्टी की घड़े का बोलना/ क्यों हम सबमें शक्ति नहीं होती ईश्वर की लीला समझने की।

संतों की एक सभा चल रही थी। सभा को देख किसी ने एक घड़े में गंगाजल भरकर वहां रखवा दिया ताकि संत जन, जब प्यास […]

क्या सेठ के बर्तनों ने सच मे दिए थे संतान/ क्या सेठ की चांदी की बर्तन का हुआ था मृत्यु। जानने के लिए इस कहानी को जरूर पढ़ें।

एक सेठ था। वह बर्तनों को किराये पर देता था और उनसे कमाई करता था।  एक बार किसी को किराये पर बर्तन दिये। वह इन्सान […]