You may also like
०६ अगस्त २०२४ मंगलवार- ‼️
-श्रावण शुक्लपक्ष द्वितीया २०८१-
मन मनुष्य का वह द्वार है जिसमें प्रवेश करने के बाद हमारी सम्पूर्ण जीवन की मनो वृति ही परिवर्तित हो जाती है । कहा गया है, “मन हमारा मित्र भी है और शत्रु भी”।
वेदों और धर्मशास्त्रों में बताया गया है कि मनुष्य के हर कर्म के 14 साक्षी होते हैं — सूर्य, अग्नि, चंद्रमा, वायु, पृथ्वी, आकाश, जल, काल, दिन, रात्रि, संध्या, दिशाएं, इन्द्रियां और धर्म। जानिए कैसे ये साक्षी हर कर्म का हिसाब रखते हैं और मनुष्य के पाप-पुण्य का निर्धारण करते हैं।
फूलों से सजी राधा-कृष्ण की भव्य झांकी भक्तों को भक्ति, सौंदर्य और अलौकिक शांति का अनुभव कराती है।
