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इस जीवन का एक मात्र सिद्धांत यही है। मनुष्य बार बार जन्म लेता है और फिर मृत्यु को प्राप्त होता है । जिस प्रकार समुद्र की लहरों का बनना एक लंबा सफर तय करना ,किनारों पर आकर शांत हो जाना । यही है जीवन रूप । अंत विराम
मित्रता एक घनी छांव की तरह है जो छाई रहे तो आनंद देती है, छट जाए तो जीवन को विरह और पीड़ा से भर देती है। स्वयं को मित्र बनाइए।
मुहब्बत है तो दर्द भी है विछुड़ने के आसूं भी हैं ।
मुहब्बत दिलों की दर्द भरी दास्तां है
इसको बयां करना जैसे खुदा की इबादत हो ।
मुहब्बत हर मुकाम पर वफाई नहीं करती ।
अक्सर बेईमानों के लिए कभी जुदाई नहीं होती ।।
